नई दिल्ली(ब्यूरो)। खुद को शिवभक्त बता चुके कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 31 अगस्त से चार-पांच दिनों की कैलास मानसरोवर यात्रा पर जाएंगे। पार्टी के सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि राहुल ने कहा था कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव हो जाने के बाद वह कैलास यात्रा पर जाएंगे। खास बात यह है कि राहुल कैलास मानसरोवर की यात्रा नेपाल नहीं बल्कि चीन के रास्ते करेंगे। गुजरात चुनाव के दौरान राहुल ने खुद को जनेऊधारी हिंदू और शिवभक्त बताया था। वे रद्राक्ष की माला भी पहनते हैं, जो गुजरात में प्रचार के आखिरी दिन पत्रकारों से बात करते समय नजर भी आई थी।

दरअसल, कर्नाटक चुनाव के समय राहुल के साथ एक ऐसी घटना घटी कि उनके मन में कैलास जाने का विचार आया था। अप्रैल में दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की जन-आक्रोश रैली में राहुल ने कहा था-मैं दो-तीन दिन पहले कर्नाटक जा रहा था। मैं विमान में सवार था। विमान अचानक आठ हजार फीट नीचे आ गया। मैं अंदर से हिल गया। तब मुझे भगवान शिव याद आए और मैंने कैलास जाने का फैसला कर लिया।' चुनाव के मौसम में राहुल के इस बयान को सॉफ्ट हिंदुत्व की ओर कांग्रेस के झुकाव से जोड़कर देखा गया था।

कर्नाटक चुनाव के दौरान भी राहुल कई मठों में गए थे। उससे पहले गुजरात चुनाव के दौरान भी वह मंदिर-मंदिर घूमे थे। हालांकि, भाजपा ने इसके चलते उन पर हमला भी बोला था। लेकिन, आलोचनाओं से बेपरवाह राहुल मंदिरों के चक्कर लगाते रहे। उस समय पारंपरिक परिधान पहने और माथे पर तिलक लगाए राहुल गांधी की कई तस्वीरें सामने आई थीं।

क्यों अहम है कैलास यात्रा
हिंदू धर्म में कैलास मानसरोवर यात्रा की खास जगह है। शिवभक्तों के लिए तो यह खासतौर पर काफी अहम है। माना जाता है कि कैलास पर्वत पर भगवान शिव का वास है। इसके बगल में ही मानसरोवर झील है। माना जाता है कि यहां का पानी पीने और यहां स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं। हालांकि, यह यात्रा बेहद मुश्किलों भरी होती है। इसमें 19,500 फीट तक की चढ़ाई चढ़नी होती है। फिर भी हर साल सैक़़डों तीर्थयात्री कैलास मानसरोवर की यात्रा पर जाते हैं।

 

Posted By: Monika Minal

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