जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आर्थिक सुस्ती के मुद्दे पर बजट से पहले सरकार को कठघरे में खड़ी कर रही कांग्रेस ने किसानों को बदहाली से राहत देने के लिए पूरे देश के किसानों का कर्ज माफ करने की बड़ी मांग की है। किसानों की आमदनी दोगुनी करने के सरकार के लक्ष्य को मंजिल से बहुत दूर करार देते हुए पार्टी ने न्यूनतम आय योजना जैसी स्कीम बजट में शामिल करने की जरूरत बताई है। साथ ही कांग्रेस ने पेट्रोल-डीजल पर लगातार बढ़ाए गए टैक्स को कम करने और इसे जीएसटी में शामिल करने की भी वकालत की है।मोदी सरकार के वादे पर कोई ठोस प्रगति नहीं- पृथ्वीराज चौहान

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान ने किसानों की आय 2022 तक करने के सरकार के वादे पर कोई ठोस प्रगति नहीं होने का हवाला देते हुए प्रेस कांफ्रेंस में यह मांग उठाई। उनका कहना था कि किसानों की मौजूदा दुर्दशा और फसलों का एमएसपी भी नहीं मिल पाना दर्शाता है कि उनकी आमदनी इस तय समय में दोगुनी नहीं होगी। ऐसे में कांग्रेस का साफ मानना है कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सबसे पहले उन्हें कर्ज के बोझ से राहत देना होगा। इसीलिए हम सरकार से बजट में किसानों के लिए राष्ट्रीय कर्ज माफी स्कीम लाने की मांग कर रहे हैं।

पृथ्वीराज ने कहा- जीएसटी में पेट्रो उत्पादों के शामिल होने से टैक्स घटेगा

पृथ्वीराज चौहान ने कहा कि इसके साथ ही किसानों के हाथ को नगदी उपलब्ध कराना भी जरूरी है क्योंकि तभी उनके पास खेती में बेहतर करने का विकल्प मिलेगा। इसके लिए उन्होंने न्याय' की तर्ज पर यूनिर्वसल बेसिक इनकम स्कीम लाने की सरकार से मांग की। पेट्रोल-डीजल में लगातार टैक्स बढ़ाकर सरकार के तिजोरी भरने की बात कहते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि अब समय आ गया है कि इन्हें जीएसटी में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि पांच साल में सरकार ने टैक्स बढ़ाकर 13.5 लाख करोड रुपये जुटाए। ऐसे में जीएसटी में पेट्रो उत्पादों के शामिल होने से टैक्स घटेगा और किसानों को डीजल पर बड़ी राहत मिलेगी।

पांच साल में किसानों की आय कितनी बढ़ी इसका ब्यौरा सरकार दे

किसानों की आमदनी बढ़ने के दावों पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि बीते पांच साल में किसानों की आय कितनी बढ़ी इसका ब्यौरा भी देश को दिया जाना चाहिए। किसानों के लिए पिछली बजट घोषणाओं में कई अहम स्कीमों की बेहद धीमी गति को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा। इसमें 2000 करोड रुपये के कृषि बाजार ढांचागत फंड, 10000 नये किसान उत्पादक संगठन बनाने और तय एमएसपी भी नहीं दिल पाने जैसे मुद्दे को उठाया।

मोदी सरकार ने किसानों को बाजारों के रहमोकरम पर छोड़ दिया

चव्हान ने कहा कि दोगुनी आय का झुनझुना दिखाकर भाजपा ने सत्ता तो हथिया ली मगर किसानों को बाजारों के रहमोकरम पर छोड़ दिया है। फसल बीमा योजना किसानों के लिए धोखा साबित हो रही है। ऐसे में जरूरी है कि किसानों के कृषि उत्पाद से जुड़ी वस्तुओं ट्रैक्टर, कीटनाशकों आदि पर जीएसटी की दर घटाई जाए। साथ ही मनरेगा का आवंटन जाए ताकि गांवों में घटती खपत के हालत को संभाला जा सके।

Posted By: Bhupendra Singh

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