नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। अर्थव्यवस्था की लगातार बढ़ती मुश्किलों और रोजगार की गंभीर होती चुनौतियों को देखते हुए कांग्रेस लॉकडाउन के चौथे विस्तार को अधिक लचीला रखने के पक्ष में है। पार्टी का मानना है कि देश के आर्थिक इंजन को दोबारा स्टार्ट करने के लिए 18 मई के बाद लॉकडाउन की सख्ती केवल रेड जोन वाले इलाकों में ही रहनी चाहिए। इसीलिए प्रधानमंत्री के साथ बैठक में कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने लॉकडाउन बढ़ाए जाने की स्थिति में राज्यों को आर्थिक गतिविधियों के लिए छूट का दायरा बढ़ाने की मांग रखी।

कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम से लेकर पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने आर्थिक पहिए थमने से रोजगार के गहराए संकट का हवाला देते हुए राज्यों को लॉकडाउन के बारे में ज्यादा अधिकार देने की वकालत की है। ताकि राज्य अर्थव्यवस्था और कारोबार को नए सिरे से शुरू करने के कदम भी उठा सकें और कोरोना महामारी के संक्रमण को भी जमीनी हालात के हिसाब से नियंत्रित कर सकें।

चिदंबरम ने तो ट्रेनें शुरू करने के फैसले का समर्थन करते हुए हवाई सेवाएं शुरू करने की भी पैरोकारी की। उनका कहना है कि रेल, हवाई ही नहीं सड़क परिवहन को शुरू करने से आर्थिक गतिविधियां चल पड़ेंगी जिससे मजदूरों का पलायन रोकने में भी काफी हद तक मदद मिल सकेगी।

कांग्रेस लॉकडाउन के दूसरे चरण के बाद से ही आर्थिक गतिविधियां ठप होने के मद्देनजर इसमें ढील दिए जाने की वकालत करती आ रही है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तो साफ कहा था कि लॉकडाउन कोरोना का इलाज नहीं बल्कि केवल पॉज बटन है और ऐसे में टेस्ट बढ़ाते हुए अर्थव्यवस्था को खोलने की जरूरत है। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने भी राहुल गांधी से साथ हुए अपने संवाद में अर्थव्यवस्था को पैकेज दिए जाने के साथ ही इसे तत्काल शुरू करने की बात कही थी। इसीलिए पंजाब के अलावा कांग्रेस शासित राज्यों के किसी अन्य मुख्यमंत्री ने सोमवार को प्रधानमंत्री के साथ बैठक में लॉकडाउन को सख्ती से जारी रखने की बात नहीं कही।

इसके विपरीत अशोक गहलोत और भूपेश बघेल ने लॉकडाउन चार को अधिक लचीला रखने और केवल रेड जोन तक ही इसे सीमित रखने के पक्ष में राय जाहिर की। कैप्टन अमरिंदर ने लॉकडाउन का समर्थन तो किया मगर अपने औद्योगिक नगरों में कामकाज व कारोबार को विशेष छूट देने की मांग की।