जेएनएन, जम्मू। केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में पंचायत उप चुनाव का बिगुल बज गया है, लेकिन नेकां और कांग्रेस ने कहा है कि जब तक उनके नेताओं को रिहा नहीं किया जाएगा तब तक वह चुनाव लड़ने के बारे में निर्णय नहीं ले सकती हैं। उनकी मांग है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को रिहा किया जाए।

जेलों में बंद कांग्रेसी नेताओं के रिहाई के बिना पंचायत उप चुनाव में कैसे हिस्सा ले सकते हैं

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर ने कहा कि हम पंचायत उप चुनाव में कैसे हिस्सा ले सकते हैं, जबकि पार्टी के बहुत से नेता व कार्यकर्ता या तो अपने घरों में नजरबंद हैं या फिर जेलों में हैं। मीर ने कहा, प्रशासन पहले नजरबंद रखे गए और हिरासत में लिए गए हमारे सभी पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं को रिहा करें, उसके बाद ही हम लोगों की राय के आधार पर इन चुनाव में हिस्सा लेने या न लेने के बारे में कोई फैसला कर सकते हैं।

मीर ने कहा- कांग्रेस चुनाव का बहिष्कार नहीं करेगी, लेकिन नेताओं को प्रचार की अनुमति नहीं

हम चुनाव का बहिष्कार नहीं कर रहे है चाहे परिणाम कुछ भी आए, लेकिन जब हमारे नेताओं को प्रचार करने की अनुमति ही नहीं है तो फिर यह कैसे संभव होगा।

2018 में पंचायत चुनाव गैर-राजनीतिक आधार पर करवाए गए थे

उन्होंने कहा कि 2018 में पंचायत चुनाव गैर-राजनीतिक आधार पर करवाए गए थे, लेकिन अब राजनीतिक आधार पर हो रहे हैं। ऐसे में सरकार को या तो पहले करवाए गए चुनाव को रद कर देना चाहिए अन्यथा ये उप चुनाव भी गैर राजनीतिक आधार पर कराए जाएं। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी 90 साल की मां को देखने के लिए जाने का आग्रह किया था, लेकिन आज तक इस संबंध में मुझे कोई जवाब नहीं मिला। मैंने अब चुनाव के सिलसिले में जम्मू से बाहर जाने के लिए पुलिस प्रशासन से इजाजत मांगी थी, लेकिन कहा गया कि जम्मू नहीं छोड़ सकते।

पार्टी अध्यक्ष ही पीएसए में बंद हैं तब चुनाव कैसे लड़ा जाएगा- नेशनल कांफ्रेंस

नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता शौकत अहमद मीर ने कहा, जब हमारी पार्टी के अध्यक्ष न केवल अपने घर में नजरबंद हैं, बल्कि उन पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट भी लगाया गया है तो ऐसे में हम कैसे चुनाव में हिस्सा लेने की सोच सकते हैं।

कोई निर्णय नहीं ले पा रहे : पीडीपी 

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेता निजामुद्दीन भट ने कहा कि वह चुनाव लड़ने संबंधित कोई निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। भट ने कहा कि चुनाव लड़ने या इसी तरह कोई भी राजनीतिक काम करने से पहले पार्टी अपने तमाम पार्टी सदस्यों से सलाह की जाती है। हमारी पार्टी की लीडरशिप या तो जेलों में बंद हैं या अपने घरों में नजरबंद। पार्टी अध्यक्ष पर पीएसए भी लगाया गया है। ऐसे में चुनाव लड़ने या न लड़ने का फैसला कैसे कर सकते हैं।

Posted By: Bhupendra Singh

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