रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड में विपक्षी महागठबंधन की हवा निकल गई है। कल तक लंबे-चौड़े दावे करने वाले विपक्षी दलों के नेता अब एक-दूसरे पर तंज कसते नजर आ रहे हैं। महज एक सीट पर हो रहे उपचुनाव में इनकी एकजुटता तहस-नहस हो गई। इसका सीधा असर आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है।

सिमडेगा जिले की कोलेबिरा विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने झापा प्रत्याशी मेनन एक्का को समर्थन की घोषणा की है। कांग्रेस ने पहले सुलह की कवायद की, लेकिन झामुमो के रुख को देखते हुए पार्टी ने कड़ा स्टैंड अपनाया और अपने प्रत्याशी की घोषणा कर डाली। कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी के पक्ष में दो प्रमुख विपक्षी दलों झाविमो और राजद का समर्थन भी जुटा लिया। इससे आने वाले दिनों में झामुमो अलग-थलग पड़ सकता है। इसका असर भविष्य में विपक्षी राजनीति पर पड़ेगा।

साल 2014 के विधानसभा चुनाव में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, झामुमो समेत अन्य दलों ने तालमेल कर चुनाव लड़ा था, लेकिन विधानसभा चुनाव में गठबंधन बरकरार नहीं रह पाया। इसका सीधा फायदा भाजपा और उसके सहयोगी दलों को मिला।

कांग्रेस ले सकती है कड़ा फैसला

कोलेबिरा विधानसभा उपचुनाव में तालमेल नहीं होने से विपक्षी दलों के बीच कड़वाहट पैदा होना स्वाभाविक है। अभी इशारों में इन दलों के नेता एक-दूसरे पर तंज कस रहे हैं। कांग्रेस ने झामुमो के बगैर विपक्षी गठबंधन के फॉर्मूले पर मंथन आरंभ कर दिया है।

झामुमो अपने स्टैंड पर कायम

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपना स्टैंड स्पष्ट रखा है। पार्टी के रणनीतिकारों का कहना है कि असली लड़ाई 2019 में होगी। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा को रोकना उसका लक्ष्य है। रही बात कांग्रेस के रुख की तो हर एक पार्टी की अपनी रणनीति और विचारधारा है।

Posted By: Manish Negi