नई दिल्ली, प्रेट्र। मुस्लिमों में एक बार में तीन तलाक की प्रथा को अपराध की श्रेणी में लाने वाला विधेयक सोमवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ऊपरी सदन में यह विधेयक पेश करेंगे। उधर, कांग्रेस का कहना है कि वह वर्तमान स्वरूप में इस विधेयक को पारित नहीं होने देगी।

भाजपा और कांग्रेस ने अपने राज्यसभा सदस्यों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी कर दिया है। इस मुद्दे पर पार्टी की रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस के सांसदों की एक बैठक भी हुई। सोमवार को भी राज्यसभा में पार्टी नेता गुलाम नबी आजाद के चैंबर में कांग्रेस सांसदों की बैठक होगी।

सभापति एम वेंकैया नायडू की सास का निधन हो गया है, इसलिए वे संभवत: सदन में मौजूद नहीं रहेंगे। उनकी जगह सदन के संचालन की जिम्मेदारी उप सभापति हरिवंश संभाल सकते हैं। गुरुवार को विपक्ष के बहिर्गमन के बीच लोकसभा द्वारा इसे मंजूरी दी जा चुकी है। विधेयक के पक्ष में 245 जबकि विपक्ष में 11 वोट पड़े थे। 

बता दें कि तीन तलाक पर गुरुवार को लोकसभा में मैराथन बहस हुई थी। सुबह से चली बहस में शाम को तीन तलाक पर बिल पास हो गया। इस ऐतिहासिक मौके पर भी संसद में आधे से ज्यादा सांसद गैरहाजिर थे। इसमें भी भाजपा के व्हिप जारी होने के बावजूद 30 सांसद अनुपस्थित थे। 

प्रसाद ने शुक्रवार को दावा किया था कि भले ही राज्यसभा में राजग के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है, लेकिन सदन में इस विधेयक को समर्थन मिलेगा। दूसरी तरफ, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने शनिवार को कोच्चि में संवाददाताओं से कहा कि पार्टी अन्य दलों के साथ मिलकर विधेयक को सदन में पारित नहीं होने देगी। प्रस्तावित कानून में एक बार में तीन तलाक को गैरकानूनी ठहराया गया है। ऐसा करने वाले पति को तीन साल के कारावास का प्रावधान है।

कम संख्या बल के बावजूद राजग ने जीता था उपसभापति का चुनाव
राज्यसभा में संख्या बल के लिहाज से विपक्ष भारी है। इसके बावजूद उपसभापति के चुनाव में राजग के हरिवंश ने विपक्षी उम्मीदवार बीके हरिप्रसाद को हरा दिया था। सदन में राजग के पास 93 और संप्रग के पास 112 सांसद हैं। एक सीट रिक्त है। अन्य पार्टियों के 39 सांसद हैं और बिल को पारित कराने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

जानिए क्या होता है व्हिप
व्हिप तीन तरह का होता है- एक लाइन, दो लाइन और तीन लाइन का व्हिप। इन तीनों मे तीन लाइन का व्हिप महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे कठोर कहा जाता है। इसका इस्तेमाल अविश्वास प्रस्ताव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे के लिए किया जाता है तथा उल्लंघन के बाद सदस्य की सदस्यता समाप्त हो जाती है।

हालांकि व्हिप को लोकतंत्र की मान्यताओं के अनुकूल नहीं माना जाता है, क्योंकि इसमें सदस्यों को अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि पार्टी की इच्छा के अनुसार कार्य करना होता है, जो लोकतंत्र की भावनाओं के विरुद्ध है। व्हिप का उल्लंघन दल बदल विरोधी अधिनियम के अंतर्गत माना जा सकता है और सदस्यता रद की जा सकती है।

Posted By: Arti Yadav

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