नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। गृहमंत्री राजनाथ सिंह राज्यसभा में आज ‘नागरिकता संशोधन बिल 2016’ पेश करने वाले थे। इससे पहले कि बिल राज्यसभा में पेश होता विपक्ष के भारी हंगामे की वजह से सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। बजट सत्र का आज (बुधवार) को अंतिम दिन था। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले सरकार का ये अंतिम संसद सत्र था। ऐसे में नागरिकता संशोधन बिल बिना पेश हुए ही लटक गया।

मालूम हो कि पूर्वोत्तर के राज्यों में काफी समय से बिल का विरोध हो रहा था। लोकसभा में आठ जनवरी को बिल पास हो चुका था। इसके बाद विपक्षी पार्टियां और पूर्वोत्तर के सामाजिक संगठनों ने बिल के खिलाफ विरोध और तेज कर दिया था। ऐसे में सरकार के सामने राज्यसभा में इस बिल को पास कराने की बड़ी चुनौती थी। अब आगामी लोकसभा चुनाव के बाद बनने वाली नई सरकार पर निर्भर करेगा कि वह नागरिकता संशोधन बिल को संसद में लाती है या नहीं।

मालूम हो कि सरकार इस बिल के जरिए नागरिकता कानून 1955 में संशोधन कर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने की बात कह रही थी। बिल चर्चा में आने के साथ ही पूर्वोत्तर के राज्यों में इसका जोरदार विरोध शुरू हो गया था। लोकसभा में सरकार ने बहुमत की वजह से बिल को भारी विरोध के बावजूद पास करा लिया था।

पूर्वोत्तर के भाजपा शासित राज्यों अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर के मुख्यमंत्री भी नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में थे। राज्यसभा में बिल पेश होने से पहले अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन ने सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर निवेदन किया था कि बिल को राज्यसभा में पास न कराएं। हालांकि गृहमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया था कि बिल पूर्वोत्तर के लोगों के हित में है।

नागरिकता संशोधन बिल 2016 की अहम बातें
1. इसके जरिए सरकार नागरिकता कानून 1955 में संशोधन कर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना चाहती है।
2. नागरिकता कानून 1955 के अनुसार बिना किसी प्रमाणित पासपोर्ट, वैध दस्तावेज या मान्य वीजा परमिट से ज्यादा दिन तक भारत में रहने वाले लोगों को अवैध प्रवासी माना जाएगा।
3. बिल पास होने का बाद तीनों पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यक माने जाने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को भारत में 12 साल की शरण के बजाय छह साल में ही नागरिकता मिल जाएगी।
4. इन शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के लिए उचित दस्तावेजों की भी आवश्यकता नहीं होगी।
5. पूर्वोत्तर के लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि इस तरह से शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने से उनकी सांस्कृतिक, भाषाई और पारंपरिक विरासत बर्बाद हो सकती है। साथ ही उन्हें कई अन्य तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
6. माना जा रहा है कि इस बिल में बांग्लादेशियों की जगह पाकिस्तानी शरणार्थियों को ज्यादा फायदा पहुंचेगा।
7. दावा है कि इस बिल के पास होने से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के 31 हजार से ज्यादा शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिल सकेगी।
8. नागरिकता संशोधन बिल इससे पहले 15 जुलाई 2016 को लोकसभा में पेश हुआ था।

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Posted By: Amit Singh

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