नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) पर सरकार और विपक्ष के बीच खिंची तलवार से साफ है कि बुधवार को राज्यसभा में विधेयक की अग्निपरीक्षा होगी। अनुच्छेद 370 को लेकर सदन में अपनी धारदार रणनीति की झलक दे चुकी सरकार राज्यसभा में आंकड़ों के अपने गणित को लगभग चाक-चौबंद कर चुकी है। हालांकि शिवसेना के विधेयक पर रुख बदलने के साफ संकेतों और टीआरएस के इस बार विपक्ष में खड़े होने से कुछ दबाव जरूर बढ़ा है।

राज्यसभा में नंबर गणित का मामला नजदीकी होने के चलते ही विपक्षी खेमे के दलों ने अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने को कहा है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने तो नागरिकता विधेयक के खिलाफ वोट करने के लिए अपने सांसदों को व्हिप भी जारी कर दिया है।

क्या हैं राज्यसभा का गणित

सोमवार को लोकसभा में 80 के मुकाबले सरकार ने 311 मतों से विधेयक पारित करा लिया था। लेकिन 245 सदस्यों वाली राज्यसभा में फिलहाल 240 सदस्य हैं और थोड़े हेरफेर से ही स्थिति रोचक हो सकती है। दरअसल, शिवसेना खेमे से यह स्वर उभर रहे हैं कि वह सदन से वॉकआउट कर सकती है। हालांकि इसकी संभावना कम है, लेकिन यह संकेत भी दिया जा रहा है कि परिस्थिति को देखते हुए वह विपक्षी खेमे के साथ वोट भी कर सकती है।

शिवसेना ने दिखाए तेवर

शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को पार्टी के रुख में बदलाव का संकेत देते हुए कहा कि जरूरी नहीं कि लोकसभा की तरह उनकी पार्टी राज्यसभा में विधेयक का समर्थन करे। शिवसेना का कहना है कि श्रीलंकाई तमिल भाषी शरणार्थियों को भी इस विधेयक में शामिल करने और इस कानून के तहत नागरिक बनने वाले शरणार्थियों को 25 साल बाद ही मतदान का अधिकार देने के उसके प्रस्ताव को सरकार मानेगी तभी पार्टी विधेयक का समर्थन करेगी।

लोकसभा में नागरिकता बिल के पक्ष में दिया था वोट 

सरकार इन शर्तो को स्वीकार नहीं करेगी यह तय है और ऐसे में शिवसेना भी राज्यसभा में विधेयक का समर्थन करने से परहेज करेगी। इस विधेयक पर सियासी सरगर्मी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस ने शिवसेना के रुख बदलने के संकेतों का स्वागत करने में देर नहीं लगाई। लोकसभा में शिवसेना ने सोमवार को नागरिकता विधेयक के पक्ष में वोट दिया था। विपक्ष सरकार के सहयोगी दल जदयू के कुछ नेताओं की तरफ से उठाए गए सवालों से भी उत्साहित है। यह और बात है कि जदयू में आवाज उठा रहे प्रशांत किशोर और पवन वर्मा फिलहाल हाशिए पर हैं और संगठन में उनकी धमक नहीं है। जदयू के एक वरिष्ठ नेता ने ही इसकी पुष्टि की।

राजग को 128 सदस्यों का समर्थन

विपक्ष की कोशिश के बावजूद राज्यसभा में आंकड़ों का गणित राजग सरकार के पक्ष में दिख रहा है। राज्यसभा में अभी 240 सदस्य हैं और नागरिकता विधेयक पर सरकार फिलहाल करीब 128 सांसदों का समर्थन जुटाती दिख रही है। इसमें शिवसेना के तीन सांसदों की संख्या शामिल नहीं है। जबकि विधेयक पारित कराने के लिए राजग को 121 के संख्या बल की जरूरत है। राजग के पास भाजपा के 83, जदयू के छह, लोजपा के एक, असम गण परिषद के एक, मनोनीत तीन सांसदों के साथ अन्नाद्रमुक के 11, बीजद के सात, वाईएसआर कांग्रेस के दो सदस्यों के अलावा टीडीपी के भी दो सांसदों का समर्थन है।

शिवसेना साथ दे तो विपक्ष को 112 सदस्यों का समर्थन

राज्यसभा में कांग्रेस के 46, तृणमूल कांग्रेस के 13, सपा के नौ, द्रमुक के पांच, माकपा के पांच, राजद के चार, राकांपा के चार, बसपा के चार, पीडीपी के दो, एमडीएमके और जदएस का एक-एक समेत विपक्षी खेमे का यह आंकड़ा 109 तक ही पहुंचता है। शिवसेना यदि राज्यसभा में बिल के खिलाफ मतदान करती है तो भी विपक्षी खेमे का आंकड़ा 112 तक ही पहुंच पाएगा। इसमें टीआरएस के छह सांसद भी शामिल हैं। अब तक राजग को हर मुद्दे पर साथ देती रही टीआरएस नागरिकता बिल पर उसका विरोध कर रही है। ऐसे में विधेयक पारित कराने से रोकने या इसे राज्यसभा की प्रवर समिति को भेजने में विपक्ष को कामयाबी मिल पाएगी, इसकी गुंजाइश नहीं है।

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