नई दिल्ली, एएनआइ। भारत में चीनी राजदूत सुन वीदोंग ने कहा कि चीन चाहता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच अच्छे संबंध हों और इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए हाथ मिलाए जाएं। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हाल ही में संपन्न अनौपचारिक वार्ता पर एएनआइ से विशेष रूप से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'चीन और भारत दोनों, क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रभाव वाले प्रमुख देश हैं। दोनों नेताओं में क्षेत्रीय स्थिति पर गहन संवाद हुआ। चीन ने जोर देकर कहा कि वह ईमानदारी से चीन और भारत, चीन और पाकिस्तान के साथ-साथ भारत और पाकिस्तान के बीच अच्छे संबंधों की आशा करता है। हमें उम्मीद है कि क्षेत्र के देशों को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने और विकास और समृद्धि को साकार करने में हाथ मिलाया जाना चाहिए।'

फरवरी में पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान मारे गए थे। पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी ली, जिसके बाद भारत ने 26 फरवरी को हवाई हमले में बालाकोट में पाकिस्तान में आतंकी शिविर तबाह कर दिया।

इसके बाद भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच संबंधों में और तल्खी तब आ गई, जब भारत सरकार द्वारा 5 अगस्त को Article 370 को जम्मू-कश्मीर से हटा दिया गया। वहां से विशेष राज्य का दर्जा ले लिया गया, जिससे सबसे ज्यादा पाकिस्तान के गलत मंसूबों को हुआ। पाकिस्तान ने दुनिया के मंच पर भी भारत के इस कदम का विरोध किया। इस्लामाबाद ने नई दिल्ली के साथ राजनयिक संबंधों को भी कम कर दिया।

विभिन्न मंचों पर बार-बार मौखिक रूप से अपमानित होने के बावजूद, पाकिस्तान को विश्व स्तर पर अलग-थलग कर दिया गया और इस मुद्दे पर बहुत कम समर्थन उसे मिल पाया, जबकि रूस, फ्रांस, अमेरिका सहित सभी प्रमुख विश्व शक्तियों ने Article 370 को देश के आंतरिक मामले के रूप में निरस्त करने की भारत की कार्रवाई का समर्थन किया।

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के भारत दौरे से पहले, पाकिस्तानी प्रधान मंत्री इमरान खान ने अपने सेना प्रमुख के साथ बीजिंग का भी दौरा किया था और अपनी मुलाकात के दौरान कश्मीर के मुद्दों को उठाया था। हालांकि, भारत ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि आतंक के चलते रहते पाकिस्तान से वार्ता नहीं की जाएगी।

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान ने घोषणा की है कि वह सार्क सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है जिसमें भारत को भी सदस्य देश के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। भारत में चीनी दूत ने यह भी कहा कि हाल ही में मोदी-शी वार्ता के दौरान, चीन ने क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करने के लिए बातचीत का दायरा बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा।

उन्होंने यह भी कहा कि चीन और भारत के बीच घनिष्ठ सहयोग का निष्पक्ष और न्यायसंगत अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के निर्माण पर महत्वपूर्ण और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वीदोंग ने कहा कि चीन का प्रस्ताव है कि चीन और भारत क्षेत्रीय अंतर-कनेक्टिविटी में अग्रणी भूमिका निभाएं और अधिक खुले कनेक्टिविटी नेटवर्क के निर्माण के लिए काम करें।

Posted By: Nitin Arora

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