भोपाल, स्टेट ब्यूरो। लाड़ली लक्ष्मी बालिकाओं की कॉलेज की पढ़ाई से लेकर नौकरी लगने तक हर संभव मदद की जाएगी। मैं वचन देता हूं, जिंदगी के हर मोड़ पर ये मामा साथ खड़ा रहेगा। योजना बेटा-बेटी का भेदभाव मिटाने के लिए शुरू हुई है और बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योजना में आवश्यक बदलाव करेंगे। यह बात मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कही। वे लाड़ली लक्ष्मी योजना की पात्र बालिकाओं से मंत्रालय से वर्चुअल बात कर रहे थे।

95,434 बालिकाओं को 27.90 करोड़ की छात्रवृत्ति और 69,337 बालिकाओं को लाड़ली प्रमाण पत्र बांटे

मुख्यमंत्री ने 95,434 बालिकाओं को 27,90 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी, वहीं 69,337 बालिकाओं को लाड़ली प्रमाण-पत्र बांटे। मुख्यमंत्री ने बेटियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि जीवन में लक्ष्य निर्धारित करें। माता-पिता को भी बेटियों को खूब लाड़ देने और बेटियों को स्वयं अपने निर्णय लेने के लिए उन्हें प्रेरित करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने रीवा की अंकु मिश्रा, बैतूल की सायरा खान से की वर्चुअल बात

उन्होंने रीवा की अंकु मिश्रा, सीहोर की मुस्कान रायकवार, अनूपपुर की शिना ध्यानी और बैतूल की सायरा खान से वर्चुअल बात की। सीहोर की कानुश्री, रीवा की किना, धार की स्वरा, अनूपपुर की अनाबिया और बैतूल की तन्वी को डिजिटल प्रमाण-पत्र दिए।

तुम नीट क्लीयर करो, मैं तुम्हें एमबीबीएस कराऊंगा

मुख्यमंत्री ने मुस्कान रायकवार से कहा कि तुम सदा मुस्कुराते रहना। मुस्कान ने डॉक्टर बनने की इच्छा जताई, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि तुम नीट क्लीयर करो। विश्वास और हौसला बनाकर रखो, मंजिल पर अवश्य पहुंचोगी। बैतूल की सायरा खान से कहा कि तुम नीट क्लीयर करो, मैं तुम्हें एमबीबीएस कराऊंगा। सायरा के पिता मजदूरी करते हैं, वह 12वीं कक्षा में है और डॉक्टर बनना चाहती है।

मैं आज भी रोज बनाता हूं अपना टाइम-टेबल : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने बेटियों से संवाद में उन्हें प्रेरित करते हुए कहा कि मैं बेटियों को कलेक्टर, डॉक्टर, इंजीनियर बनते देखना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि अनुशासन सफलता का आधार है। आप अपना लक्ष्य तय करें, रोडमेप बनाएं और प्रतिदिन टाइम-टेबल तय कर उसका पालन करें। मैं आज भी प्रतिदिन अपना टाइम-टेबल बनाता हूं और उसके अनुसार ही पूरे दिन के कार्य संपादित करता हूं।

Edited By: Bhupendra Singh