जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कांग्रेस ने यस बैंक संकट को एनडीए सरकार के दौरान वित्तीय संस्थाओं में जारी घोर कुप्रबंधन का नतीजा बताया है। साथ ही रिजर्व बैंक से यस बैंक संकट की गहन जांच कर बैंकिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता बहाल करने को कहा है। पार्टी ने यस बैंक के लोन में बीते पांच साल खासकर नोटबंदी के बाद हुए भारी इजाफे पर सरकार से स्पष्टीकरण की मांग करते हुए सवाल उठाया कि रिजर्व बैंक और सरकार की दोहरी ऑडिट व्यवस्था इसे कैसे नहीं पकड़ पायी।

कांग्रेस ने कहा- बैंकिंग व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर पड़ रहा

पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम और कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि बैंकों के नाकाम होने की घटनाओं से बैंकिंग व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है। अर्थव्यवस्था जो पहले से ही कई चुनौतियों से जूझ रही है, वह हमारे वित्तीय संस्थाओं के इस तरह गिरते साख की वजह से ज्यादा गंभीर हो रही है। इसलिए बैंकिंग व्यवस्था में विश्वसनीयता बहाल करने के लिए जरूरी है कि सबसे पहले रिजर्व बैंक यस बैंक के संकट की गहरायी से जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करे।

चिदंबरम ने कहा- यस बैंक कर्ज दे नहीं, बल्कि लुटा रहा था

चिदंबरम ने यस बैंक के लोन में सालाना 35 फीसद के इजाफे को हैरतअंगेज बताते हुए कहा कि इस आंकड़े के बावजूद रिजर्व बैंक और सरकार के बैंकिंग ऑडिट की आंख नहीं खुलना आश्चर्यजनक है। 2014 के बाद खासकर नोटबंदी के पश्चात के दो सालों में बैंक के लोन दर पर तंज कसते हुए चिदंबरम ने कहा कि यस बैंक कर्ज दे नहीं बल्कि लुटा रहा था। उन्होंने सवाल उठाया कि रिजर्व बैंक में क्या इसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं है?

2019 तक बैंकिंग सेक्टर की कुल 16,88,600 करोड़ रुपये की पूंजी क्षीण हो चुकी

सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि दिसंबर 2019 तक बैंकिंग सेक्टर की कुल 16,88,600 करोड़ रुपये की पूंजी क्षीण हो चुकी है। 2014 के बाद 7,78,000 करोड रुपये का बैंक कर्ज माफ हुआ है। दिसंबर 2019 तक बैंकों का कुल एनपीए 9,10,800 करोड रुपये पहुंच गया है। एसएमइ सेक्टर के कर्ज पर लगी पाबंदी मार्च के अंत में जब खत्म होगी तो यह आंकड़ा कहीं ज्यादा बढ़ जाएगा।

मुद्रा योजना के तहत दो लाख करोड रुपये का लोन माफ हुआ

मुद्रा योजना के तहत दो लाख करोड रुपये का लोन माफ हुआ है और 17000 करोड रुपये का एनपीए है। इसी तरह खुद वित्तमंत्री ने संसद में बताया कि बैंक फ्राड की राशि 2013-14 में 10,171 करोड से बढ़कर 2019-20 में 1,43,068 करोड रुपये पहुंच गई है। चिदंबरम ने कहा जनता को वित्तीय कुप्रबंधन के इन मुद्दों पर सोचने की जरूरत है।

सालाना बैलेंस सीट को क्या रिजर्व बैंक और सरकार दोनों ने नहीं देखा

कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि बैंक के सालाना बैलेंस सीट को क्या रिजर्व बैंक और सरकार दोनों ने नहीं देखा? जब जनवरी 2019 में बैंक का सीइओ बदला गया और रिजर्व बैंक के एक डिप्टी गर्वनर को एस बैंक बोर्ड में शामिल किया गया उसके बाद कोई बदलाव नहीं हुआ। यहां तक की मई 2019 में जब यस बैंक ने पहली बार अपने तिमाही घाटे की घोषणा की तभी खतरे की घंटी सरकार और रिजर्व बैंक को सुनाई नहीं दी।

हिस्सेदारी से बेहतर होगा एसबीआइ करे यस बैंक का अधिग्रहण

यस बैंक संकट समाधान को लेकर एसबीआइ के प्लान पर चिदंबरम ने कहा कि यह प्लान हैरान करने वाला है क्योंकि जिस बैंक का कुल मूल्य लगभग शून्य है उसके लिए 2450 करोड रुपये देकर 49 फीसद हिस्सेदारी लेना समझ से परे है। एसबीआइ को चाहिए कि वह एक रुपये में यस बैंक का सारा कर्ज लेकर उसकी वसूली शुरू करे और बैंक के ग्राहकों का एक-एक पैसा मिले यह सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि सबसे बेहतर तो यही होगा कि एसबीआइ ही यस बैंक का अधिग्रहण कर ले।

Posted By: Bhupendra Singh

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