नई दिल्ली(जेएनएन)। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने आलोक वर्मा के खिलाफ अपनी जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार और कर्तव्यों में लापरवाही के आरोप लगाए थे। इसके समर्थन में सीवीसी ने गुप्तचर एजेंसी 'रॉ' द्वारा किए गए टेलीफोन इंटरसेप्शन का हवाला दिया था। अधिकारियों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय चयन समिति ने सीवीसी की रिपोर्ट पर विचार किया। समिति ने निदेशक पद से हटाने का फैसला सुना दिया। समिति के सदस्य को तौर पर प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश के प्रतिनिधि के तौर पर आए जस्टिस सीकरी ने एक मत से हटाने का फैसला लिया। जबकि कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसका विरोध किया। वर्मा को बाकी बचे 21 दिनों के कार्यकाल के लिए फायर सर्विस का महानिदेशक बना दिया गया है। वर्मा की अनुपस्थिति में सीबीआइ निदेशक का कार्यभार संभालने वाले एम नागेश्वर नए निदेशक की नियुक्ति तक कार्यवाहक निदेशक के रूप में काम संभालेंगे।

इसमें आलोक वर्मा के खिलाफ आठ आरोप लगाए गए थे। सीवीसी की रिपोर्ट में 'रॉ' के इंटरसेप्ट्स भी शामिल हैं जिसमें सीबीआइ में नंबर वन को पैसे देने की बात की जा रही है। मांस कारोबारी मोईन कुरैशी के मामले की जांच कर रही सीबीआइ टीम हैदराबाद के कारोबारी सतीश बाबू सना को आरोपित बनाना चाहती थी, लेकिन आलोक वर्मा ने कभी इसकी मंजूरी नहीं दी। इस मामले की जांच का नेतृत्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना कर रहे थे।

दूसरा मामला सीबीआइ द्वारा गुरुग्राम में जमीन अधिग्रहण मसले की प्रारंभिक जांच से जुड़ा है। सीवीसी का आरोप है कि इस मामले में भी आलोक वर्मा का नाम आया और इसमें कम से कम 36 करोड़ रुपये की रिश्वत ली गई। सीवीसी ने इस मामले में विस्तृत जांच की सिफारिश की थी।सीबीआइ के कामकाज की निगरानी करने वाले सीवीसी ने यह भी आरोप लगाया था कि वर्मा ने लालू प्रसाद यादव से जुड़े आइआरसीटीसी मामले में एक अधिकारी को बचाने की कोशिश की थी। साथ ही वह दागी अधिकारियों को सीबीआइ में लाने की कोशिश कर रहे थे।

 लालू प्रसाद और मोईन कुरैशी से जुड़ा मामला

सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के साथ लड़ाई आलोक वर्मा को भारी पड़ी। अस्थाना ने वर्मा पर लालू यादव के खिलाफ होटल के बदले जमीन घोटाले में छापे में रुकावट डालने से लेकर मांस व्यापारी मोईन कुरैशी के मामले में दो करोड़ रुपये की रिश्वत लेने समेत कई आरोप लगाए थे। यही नहीं, अस्थाना के मातहत काम करने वाली जांच टीम ने सतीश बाबू सना से सीआरपीसी की धारा 161 का बयान भी दर्ज कर लिया था, जिसमें उसने आलोक वर्मा को रिश्वत देने की बात मानी थी।

छुट्टी-बहाली-बिदाई

--23 अक्टूबर 2018 छुट्टी पर भेजा

--8 जनवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट से बहाल

--9 जनवरी को फिर कार्यभार संभाला

--10 जनवरी 2019 को बिदाई

Posted By: Sanjeev Tiwari

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