जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के बंटवारे और केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद सीबीआइ ने वहां के प्रशासन में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआइ ने गैर-कानूनी तरीके से दूसरे राज्यों के लोगों को हथियार का लाइसेंस देने के मामले में जम्मू-कश्मीर के आठ जिलों के उपायुक्त या जिलाधिकारियों के ठिकानों समेत कुल 17 स्थानों पर छापा मारा, जिनमें दो आइएएस अधिकारी यश मुद्गल और कुमार राजीव रंजन शामिल हैं। मुद्गल फिलहाल जम्मू के पावर वितरण कारपोरेशन के सीएमडी और राजीव रंजन जम्मू-श्रीनगर मेट्रो रेल कारपोरेशन के सीईओ हैं।

जिलाधिकारियों के ठिकानों पर सीबीआइ के छापे

सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राज्य प्रशासन की अनुसंशा पर पिछले साल अगस्त में ही इस मामले में दो केस दर्ज किये गए थे और जुलाई महीने में मुख्य तौर पर हथियार बेचने वाले लाइसेंसी दुकानदारों पर छापा मारा गया था, जिसमें बड़ी मात्रा में दस्तावेज बरामद हुए थे। उन दस्तावेजों की पड़ताल व जांच के बाद सोमवार को कुपवाड़ा, बारामुला, उधमपुर, किश्तवार, सोपियां, राजौरी, डोडा, पुलवामा के तत्कालीन उपायुक्तों या जिलाधिकारियों के ठिकानों की तलाशी ली गई। इनमें श्रीनगर, जम्मू, मोहाली, गुरुग्राम, और नोएडा में कुल 17 स्थान शामिल हैं। सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 2012 से 2017 के बीच जारी सभी लाइसेंस की जांच की जा रही है।

जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर गैर-कानूनी तरीके से आर्म्स लाइसेंस दिए गए थे

दरअसल जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर गैर-कानूनी तरीके से हथियार का लाइसेंस दूसरे राज्यों के लोगों को देने का खुलासा राजस्थान के आतंकरोधी दस्ते (एटीएस) ने किया था। राजस्थान एटीएस ने नवंबर 2017 में राज्य में जम्मू-कश्मीर से हथियार का लाइसेंस दिलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 52 लोगों को गिरफ्तार किया था।

एक लाख से ज्यादा लाइसेंस दूसरे राज्यों के लोगों को जारी किये गए थे

एटीएस के अनुसार जम्मू क्षेत्र के डोडा, रामबन और उधमपुर जिले में कुल एक लाख 43 हजार 13 हथियारों के लाइसेंस में से एक लाख 32 हजार 321 लाइसेंस दूसरे राज्यों के लोगों को जारी किये गए थे। पूरे जम्मू-कश्मीर में पिछले एक दशक में जारी चार लाख 29 हजार 301 लाइसेंस में से केवल 10 फीसदी ही राज्य के लोगों को दिया गया था। जाहिर है आतंकवाद से ग्रस्त राज्य में बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से हथियारों के लाइसेंस जारी किये जा रहे थे। इसके बाद राजस्थान के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक ओपी गलहोत्रा ने पूरे मामले की जांच सीबीआइ से कराने का अनुरोध किया था।

राज्यपाल मलिक ने की थी फर्जी आर्म्स लाइसेंस की जांच सीबीआइ से कराने की सिफारिश

जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल एसपी मलिक ने इसकी जांच सीबीआइ से कराने की सिफारिश की थी। राज्य में अवैध तरीके से जारी किये जा रहे हथियारों की समस्या को देखते हुए जुलाई 2018 में एसपी मलिक के राज्यपाल रहने के दौरान जनवरी 2017 से लेकर फरवरी 2018 के बीच जारी किये हथियारों के सभी लाइसेंस को रद कर दिया गया था।

Posted By: Bhupendra Singh

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