नई दिल्ली, प्रेट्र। बहुचर्चित राफेल लड़ाकू विमान खरीद करार को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा तैयार की गई ऑडिट रिपोर्ट सरकार मंगलवार को संसद में पेश करेगी। मौजूदा 16वीं लोकसभा का बुधवार को अंतिम दिन है और अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होना हैं। कांग्रेस सत्तारूढ़ राजग सरकार पर राफेल करार में भ्रष्टाचार व धांधली के आरोप लगा रही है। ऐसे में कैग की रिपोर्ट सरकार के पक्ष में आने पर राजग को क्लीनचिट मिल सकती है।

राष्ट्रपति व वित्त मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट

मोदी सरकार ने फ्रांस की विमानन कंपनी दसौ से 36 राफेल विमान तैयार व हथियारों से लैस खरीदे हैं। इसकी कीमत व अन्य शर्तो को लेकर कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निजी तौर पर हमले कर रही है, जबकि राजग सौदे का भरपूर बचाव कर रहा है। कैग अपनी रिपोर्ट की एक प्रति राष्ट्रपति के पास और दूसरी प्रति वित्त मंत्रालय के पास भेजते हैं।

सूत्रों के अनुसार, कैग ने राफेल पर 12 चैप्टर लंबी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। कुछ हफ्ते पहले ही रक्षा मंत्रालय ने राफेल पर विस्तृत जवाब और संबंधित रिपोर्ट कैग को सौंपी थी। इसमें खरीद प्रक्रिया की अहम जानकारी के साथ 36 राफेल की कीमतें भी बताई थीं।

सुप्रीम कोर्ट को भी नहीं दिखा आरोपों में दम

राफेल डील में भ्रष्टाचार का मामला सुप्रीम कोर्ट भी गया था, लेकिन शीर्ष कोर्ट ने आरोपों में कोई तथ्य नहीं पाया। हालांकि इसके बाद भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार संसद में व बाहर उछाल रहे हैं और वे सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर उद्योगपति अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के आरोप लगा रहे हैं।

कैग पर हितों से टकराव का आरोप, जेटली ने ठुकराया

इस बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कैग राजीव महर्षि पर हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए उन्हें राफेल पर रिपोर्ट से दूर रहने को कहा। उनका कहना है कि जब करार हुआ था तब महर्षि वित्त सचिव थे। ऐसे में वही ऑडिट रिपोर्ट भी कैसे बना सकते हैं?

सिब्बल के आरोपों को ठुकराते हुए केंद्रीय मंत्री अरण जेटली ने कहा कि कांग्रेस का यह आरोप झूठा है। संप्रग सरकार में 10 साल मंत्री रहने के बाद भी सिब्बल को यह नहीं पता है कि वित्त सचिव सिर्फ एक पद है, जो कि वित्त मंत्रालय के सबसे वरिष्ठ सचिव को दिया जाता है।

सिब्बल का कहना है कि महर्षि 24 अक्टूबर 2014 से 30 अगस्त 2015 तक वित्त सचिव थे। प्रधानमंत्री मोदी राफेल डील पर दस्तखत के लिए 10 अप्रैल 2015 को पेरिस गए थे। वित्त सचिव ने राफेल करार की चर्चा में अहम भूमिका निभाई थी। अब वही कैग हैं, इसलिए हम उनसे इसकी जांच से दूर रहने की मांग कर रहे हैं।

करार से पहले मानक खरीद प्रक्रिया बदली : मीडिया रिपोर्ट

उधर सोमवार को एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि सरकार ने राफेल करार पर दस्तखत से कुछ दिन पहले ही मानक रक्षा खरीद प्रक्रिया (एसओपी) में भ्रष्टाचार के खिलाफ पेनल्टी से जुड़े अहम प्रावधानों को हटाया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा खरीदी परिषद ने सितंबर 2016 में अंतर सरकारी समझौते, आपूर्ति नियम, ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट्स और ऑफसेट शेड्यूल में नौ बदलावों को मंजूरी दी।

संप्रग सरकार ने बदले नियम?

वहीं एक अन्य न्यूज एजेंसी ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि संप्रग सरकार ने ही नियम बनाया था कि मित्र देशों के साथ अंतर सरकारी समझौते के एसओपी में मामले में कुछ शर्तो से छूट दी जा सकती है। मोदी सरकार ने संप्रग सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का ही पालन किया है।

 

Posted By: Arun Kumar Singh