मुरैना, राज्य ब्यूरो। प्रदेश में सियासी उठापटक के बाद अब नई सरकार के गठन और बागियों की सीटों पर भावी उपचुनाव की रणनीति बनने लगी है। मुरैना जिले की छह विधानसभा सीट में से चार से कांग्रेस के बागियों ने इस्तीफे दे दिए हैं, वहीं एक का निधन हो गया है। इस कारण पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होंगे। क्षेत्र की छठी सबलगढ़ सीट से कांग्रेस के बैजनाथ कुशवाह विधायक हैं।

पहले सिर्फ जौरा में था उपचुनाव

सियासी संकट व कमल नाथ सरकार के इस्तीफे से पहले जिले की जौरा विधानसभा सीट पर विधायक बनवारीलाल शर्मा के निधन की वजह से उपचुनाव होने वाले थे, लेकिन अब सुमावली, मुरैना, दिमनी व अंबाह विधानसभा के विधायकों ने भी इस्तीफे दे दिए हैं। ऐसे में जौरा के साथ इन चारों विधानसभाओं में भी उपचुनाव होंगे। बागियों को उनकी सीटों से टिकट कांग्रेस विधायकों के भाजपा में शामिल होने की वजह से भाजपा के उन कार्यकर्ताओं व नेताओं को खासी परेशानी हो रही है, जो इन विधानसभाओं से टिकट मांग रहे थे। पार्टी सूत्र बताते हैं कि अंचल के जिन विधायकों ने इस्तीफे दिए हैं, उन्हें डील के मुताबिक उनके विधानसभा क्षेत्रों से ही टिकट दिए जाएंगे।

असमंजस की स्थिति

जौरा के अलावा मुरैना की रिक्त हुई चार सीटों को लेकर भाजपा से टिकट के दावेदार असमंजस में हैं। हालांकि ये नेता व कार्यकर्ता प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं। फिर भी वे इन पूर्व विधायकों को भाजपा से टिकट मिलने की चर्चाओं से काफी परेशान हैं। 

कहां पर किस-किस को हो सकती है परेशानी

सुमावली : सुमावली विधानसभा क्षेत्र से भाजपा से पूर्व विधायक गजराज सिंह सिकरवार, उनके बेटे सत्यपाल सिंह सिकरवार व अजब सिंह कुशवाह के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है, क्योंकि यहां से एदल सिंह कंषाना भाजपा से चुनाव लड़ने की ताल ठोक सकते हैं। 

मुरैना : मुरैना विधानसभा से गुर्जर नेता होने की वजह से लगातार पूर्व मंत्री रस्तम सिंह को टिकट मिलता रहा है। दो बार में जीते तो मंत्री बने और दो बार वे हारे हैं। अब मुरैना से पूर्व विधायक रघुराज कंषाना भाजपा से मैदान में आएंगे तो रस्तम सिंह के लिए टिकट का संकट होगा। इसके अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष गीता हर्षाना व जिला पंचायत सदस्य हमीर पटेल, वैश्य वर्ग से अनिल गोयल आदि के लिए भी परेशानी हो सकती है। क्योंकि ये लोग भी टिकट के दावेदार हैं। 

दिमनी : दिमनी विधानसभा के निवर्तमान विधायक गिर्राज डंडोतिया फिर मैदान में होंगे। इससे सबसे अधिक मुश्किल पूर्व विधायक शिवमंगल सिंह के लिए आने वाली है। साथ ही यहीं से टिकट मांगने वाले अन्य भाजपा नेताओं के सामने भी मुश्किल आएगी।

अंबाह : अंबाह विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है, लेकिन यहां से कांग्रेस विधायक पद से इस्तीफा देने वाले कमलेश जाटव आते हैं तो यहां के पूर्व विधायक बंसीलाल व कमलेश सुमन व 2018 में चुनाव लड़े गब्बर सखवार के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती है। 

जौरा : भाजपा से 2013 में भाजपा से विधायक सूबेदार सिंह रजौधा रहे थे, लेकिन 2018 में वे चुनाव हार गए थे। यहां से 2018 में कांग्रेस से विधायक बनवारीलाल शर्मा बने थे। उनके निधन के बाद उनके बेटे प्रदीप व भतीजे नागेश टिकट के दावेदार थे। अब वे सिंधिया के साथ भाजपा में आए हैं, इसलिए ये भी टिकट की डिमांड करेंगे। ऐसे में सूबेदार सिंह के लिए मुश्किल हो सकती है।

भाजपा में साइड लाइन किए नेता भी सामने

ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में आने के बाद भाजपा के साइडलाइन किए गए नेता भी अब सामने आने लगे हैं। ये नेता अब जौरा उपचुनाव में अपनी किस्मत आजमाने में लगे है। मसलन पूर्व सांसद अनूप मिश्रा हैं, जिन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया गया। इससे पहले वे भितरवार से चुनाव हार चुके थे। लोकसभा चुनाव के बाद उनका मूवमेंट भी जिले में नहीं हुआ। चूंकि उनके संबंध सिंधिया से अच्छे बताए जाते हैं। इसलिए वे अब जौरा से विधानसभा टिकट के लिए आगे आए हैं। यही वजह है कि उनके समर्थकों ने शहर में सिंधिया के स्वागत वाले पोस्टर लगाए हैं। ये पोस्टर अब चर्चा का विषय बन रहे हैं।

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