नई दिल्ली, जेएनएन। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने जैसे ही भारी बहुमत से सत्ता में वापसी, वैसे ही अर्थशास्त्रियों ने यह कयास लगाना शुरू कर दिया था कि दूसरे दौर के आर्थिक सुधारों को लागू करने का इससे माकूल वक्त नहीं आ सकता है। अभी तक वित्त मंत्रालय में बजट-पूर्व बैठकों और दूसरे मंत्रालयों से चल रहे विमर्श से जो संकेत सामने आ रहे हैं, उससे ऐसा लगता है कि विशेषज्ञों की बात सही साबित होगी।

पांच जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से पेश होने वाला आम बजट वित्तीय और कृषि क्षेत्र के लिए दूरगामी नतीजों वाला हो सकता है। सरकार की मंशा अब बेकार पड़े और नाकाम साबित हो चुके सरकारी उपक्रमों को आगे ले जाने की बिल्कुल भी नहीं है। दूसरी तरफ, सरकारी क्षेत्र के बैंकों में एकीकरण को लेकर अब सरकार खुलकर अपने एजेंडा को लागू करने को भी तैयार है।

वित्त मंत्री सीतारमण और उनके आला अधिकारियों के साथ पिछले एक हफ्ते के दौरान बजट-पूर्व बैठकों में भाग लेने वाले उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों और अर्थशास्ति्रयों के मुताबिक सरकार ने अपनी मंशा बता दी है कि बजट एक तरह से अगले पांच वर्षो की आर्थिक नीतियों की नींव रखेगी। सरकार को अर्थव्यवस्था के समक्ष मौजूदा चुनौतियों का पूरा आभास है। इसलिए सुधारों को लेकर कोई भी हिचकिचाहट नहीं होगी।

वित्त मंत्रालय का आकलन है कि पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए देश के वित्तीय क्षेत्र के मौजूदा स्वरूप में बड़े बदलाव करने होंगे। वित्तीय क्षेत्र में सुधार को लेकर सरकार के एजेंडे में सरकारी बैंकों में विलय व एकीकरण सबसे उपर है। इस बारे में एक प्रस्ताव पहले ही तैयार हो चुका है।

कॉरपोरेट बांड बाजार को बढ़ावा देने को लेकर भी हाल ही में वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) में विमर्श हुआ है। इस बारे में बजट मे भी कदम उठाया जाएगा और उसके बाद आरबीआइ की तरफ से भी कुछ घोषणाएं होंगी। संकट से जूझ रही गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को अतिरिक्त फंड जुटाने की व्यवस्था संबंधी एलान भी आगामी बजट में हो सकता है।

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री ने शनिवार को नीति आयोग की गवर्निग काउंसिल की बैठक में कृषि सुधार पर एक उच्चस्तरीय समिति बनाने का एलान किया है। इस समिति को कृषि क्षेत्र में सुधारों के नए दौर को लेकर सुझाव देने को कहा गया है। यह एक तरह से सुधारों को लेकर सरकार की मंशा को दर्शाता है। इस समिति की सिफारिशें तो बाद में लागू की जाएगी, लेकिन उससे पहले आम बजट में कृषि क्षेत्र को सुधारों की एक और खुराक दी जाएगी।

मंडियों में सुधार और अनाज भंडारण को लेकर सरकार बजट बढ़ाने जा रही है। इसी तरह से सरकारी क्षेत्र की कंपनियों को लेकर सरकार का नया रूप देखने को मिलेगा। खासतौर पर वैसे उपक्रम जिन्हें लगातार सरकारी खजाने से मदद दी जा रही है, उन पर सरकार अब पूरी तरह से पर्दा गिराने का मूड बना चुकी है। सरकार का विनिवेश कार्यक्रम पहले की तरह ही मजबूती से आगे बढ़ेगा और अपनी उपयोगिता खो चुके सार्वजनिक उपक्रमों को बंद करने का दो टूक फैसला भी होगा।

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Posted By: Tanisk

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