मुंबई में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स! BMC चुनाव के बाद शिंदे के पार्षद होटल में शिफ्ट, क्या कुछ बड़ा होगा?
मुंबई में बीएमसी चुनाव के बाद एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने अपने पार्षदों को फाइव स्टार होटल में ठहराया है। ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मुंबई की राजनीति में एक बार फिर 'रिसॉर्टपॉलिटिक्स' देखने के मिल रही है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों के नतीजे आने के ठीक बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने अपने निर्वाचित पार्षदों को फाइव स्टार होटल में शिफ्ट करना शुरू कर दिया है।
शिंदे गुट की इस कवायद को सत्ता गणित और भविष्य की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। मुंबई BMC चुनावों में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे) गठबंधन बहुमत के पार पहुंच गया है और शिंदे गुट 'किंगमेकर' की भूमिका में आ गया है। सूत्रों के मुताबिक, इस कदम के पीछे दो बड़ी वजहें मानी जा रही हैं।
- पहली वजह:- यह आशंका है कि विपक्षी दल एकजुट होकर सत्ता समीकरण बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं।
- दूसरीवजह:- महायुति के भीतर मेयर पद को लेकर चल रही खींचतान एक वजह बताई जा रही है।
भाजपा-शिवसेना बहुमत के पार
सूत्रों का कहना है कि शिंदे गुट अपने पार्षदों को साथ बनाए रखने और किसी भी तरह की तोड़-फोड़ से बचने के लिए सतर्कता बरत रहा है। BMC की कुल 227 सीटों में बहुमत का आंकड़ा 114 है। बीजेपी ने 89 सीटें जीती हैं, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं। दोनों की सीटें मिलाकर 118 सीट हो जाती है, जो बहुमत से ज्यादा है।
विपक्ष होगा एकजुट?
दूसरी ओर, विपक्षी खेमे में शिवसेना (UBT), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और एनसीपी (शरद पवार) ने मिलकर चुनाव लड़ा था। शिवसेना (UBT) को 65, मनसे को 6 और एनसीपी (SP) को सिर्फ 1 सीट मिली, यानी कुल 72 सीटें। इसके अलावा कांग्रेस ने 24, AIMIM ने 8और समाजवादी पार्टी ने 2 सीटें जीती हैं। अगर पूरा विपक्ष एकजुट होता है तो उनकी कुल ताकत 106 सीटों तक पहुंच जाती है।
इस स्थिति में विपक्ष को बहुमत के लिए सिर्फ 8 और पार्षदों की जरूरत होगी। इसी संभावना को देखते हुए होर्स-ट्रेडिंग और दल-बदल की आशंका जताई जा रही है। अगर विपक्ष महायुति से 8 पार्षद तोड़ने में कामयाब हो जाता है, तो बीजेपी के नेतृत्व में BMC पर काबिज होने की योजना को झटका लग सकता है।
रिसॉर्ट वाली रणनीति के क्या हैं मायने?
शिंदे गुट की 'रिसॉर्ट वाली रणनीति' बीजेपी के साथ सौदेबाजी से भी जोड़कर देखी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (शिंदे) BMC के मेयर पद पर अपना दावा छोड़ने के मूड में नहीं है। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर दबाव है कि मेयर पर शिवसेना के पास ही रहना चाहिए।
सूत्रों का कहना है कि कई पार्षद चाहते हैं कि शिंदे गुट जूनियर पार्टनर होने के बावजूद मेयर पद पर कोई समझौता न करे। यही वजह है कि पार्षदों को एकजुट रखने और अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
