नई दिल्ली, प्रेट्र। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को अपने पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रवक्ताओं से राम मंदिर मामले में भावनात्मक और भड़काऊ बयान देने से बचने की नसीहत दी। पार्टी ने अपने नेताओं से यह भी कहा है कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अथवा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का इस संबंध में बयान नहीं आता तब तक वे इस मुद्दे पर टिप्पणी न करें और मोदी तथा शाह के बयानों के अनुरूप ही प्रतिक्रिया व्यक्त करें।

बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी कुछ दिन पहले अपने प्रचारकों को इसी तरह का परामर्श जारी किया था। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हाल ही में प्रचारकों की बैठक में कहा था कि राम मंदिर फैसला पक्ष में आने पर विजय उत्सव नहीं मनाया जाए और जुलूस नहीं निकाले जाएं।सूत्रों के अनुसार भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी प्रवक्ताओं, देशभर के मीडिया और सोशल मीडिया विभागों की बैठक में उनसे राम मंदिर के मुद्दे पर अनावश्यक बयान देने से बचने को कहा। 

भाजपा की सोशल मीडिया इकाई के प्रमुख अमित मालवीय ने भी पार्टी की सोशल मीडिया टीमों को इस बारे में जानकारी दी कि इस तरह के मंचों पर विवादास्पद बयान देने से कैसे बचें। गौरतलब है कि 27 अक्टूबर को अपने मन की बात कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया था कि अयोध्या मामले में 2010 में जब इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला आने वाला था तो किस तरह राजनीतिक दलों तथा सिविल सोसायटी के लोगों ने धैर्य और संयम का परिचय देकर देश में तनाव नहीं फैलने दिया।

यहां तक की भाजपा द्वारा अपने स्पोकपर्सन को भी मीडिया डिबेट में जाने से मना कर दिया गया है। भाजपा नहीं चाहती कि प्रवक्ताओं द्वारा TV पर अयोध्या मामले में किसी भी फैसले से पहले कोई गलत बयान सामने आ जाए।

Posted By: Nitin Arora

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