तिरुवनंतपुरम, आइएएनएस। केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरोध में खड़ी हुई भाजपा को इस मसले पर सियासी लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। पार्टी को लगता है कि हिंदू परंपराओं की रक्षा के लिए उठाए गए उसके कदम से लोगों का भावनात्मक लगाव उसके साथ बढ़ेगा, जो वामपंथी शासन वाले राज्य में उसे सियासी फायदा पहुंचाएगा। और अगले लोकसभा चुनाव में पार्टी राज्य में अपना खाता खोलने में सफल होगी।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पीएस श्रीधरन पिल्लई का कहना है कि वामदलों के प्रभुत्व वाले केरल में पार्टी का वोट प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है। उनका कहना है कि सबरीमाला मंदिर मुद्दे पर भाजपा के रुख से जहां उसके नैतिक बल में इजाफा हुआ है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनवरी महीने में राज्य के दो दौरों ने जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के मनोबल में नई ऊर्जा का संचार किया है।

श्रीधरन पिल्लई ने कहा कि भगवान अयप्पा मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भाजपा और संघ ने विरोध अभियान चलाया था। अब हर किसी को यकीन है कि अगले लोकसभा चुनाव में पार्टी को इसका सियासी लाभ जरूर मिलेगा। नेताओं के अब तक के सबसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

पिल्लई ने बताया कि 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का वोट प्रतिशत 10.33 फीसद था, जो 2016 में हुए विधानसभा चुनाव में बढ़कर 15.10 फीसद हो गया। 2014 के चुनाव में तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से भाजपा के ओ राजगोपाल दूसरे नंबर रहे थे। 2016 के चुनाव में वह विधानसभा पहुंचने में सफल हुए थे। अब उम्मीद है कि 2019 के चुनाव में केरल से भाजपा को लोकसभा में जरूर प्रवेश मिलेगा। राज्य की लोकसभा की 20 सीटों में से भाजपा को कम से कम एक पर जीत मिलने की पूरी उम्मीद है। पार्टी भारत धर्म जन सेना और केरल कांग्रेस (थामस) जैसी पार्टियों के साथ सीटों के बंटवारे पर बातचीत भी कर रही है। पिल्लई के मुताबिक इस महीने के आखिर में सीट बंटवारे को लेकर फैसला हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सहयोगी दलों के साथ एक व्यापक आपसी समझ बन गई है। हालांकि, उन्होंने ज्यादा कुछ बताने से इन्कार कर दिया।

मलयाली अभिनेता कोल्लम तुलनी ने किया समर्पण
सबरीमाला मंदिर में प्रवेश को लेकर महिलाओं के खिलाफ भड़काऊ बयान देने के आरोपी मलयाली फिल्म अभिनेता कोल्लम तुलसी ने मंगलवार को कोल्लम जिले में पुलिस के सामने समर्पण कर दिया। भगवान अयप्पा मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान तुलसी ने यह बयान दिया था।

उन्होंने कहा था कि मंदिर में प्रवेश करने वाली युवा महिलाओं के दो टुकड़े कर एक भाग दिल्ली और एक भाग केरल सरकार को भेज देना चाहिए। हालांकि, बाद में उन्होंने अपने इस बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली थी। लेकिन माकपा की युवा इकाई के एक नेता ने उनके खिलाफ केस दर्ज करा दिया था। केरल हाई कोर्ट ने 10 जनवरी को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी और उन्हें पुलिस के सामने समर्पण करने को कहा था।

Posted By: Ravindra Pratap Sing

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