नई दिल्ली (जेएनएन)। बुधवार को लोकसभा उपचुनावों परिणाम आने के बाद सदन में भाजपा के सीटों की संख्या 2014 के 282 से घटकर 272 पर पहुंच गई। लोकसभा में मौजूदा समय में 536 सदस्य हैं जबकि सात सीटें रिक्त हैं। इस हिसाब से सदन में भाजपा अब भी अकेले बहुमत में है। हालांकि सहयोगियों के साथ उसके पास भारी बहुमत है।

उत्तर प्रदेश में 2014 के आम चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा को पहली बार लोकसभा की दो सीटों के उपचुनाव में हार मिली है। इससे पहले इस साल जनवरी में पार्टी को राजस्थान में अजमेर और अलवर में पराजय का सामना करना पड़ा था। 2014 के लोकसभा चुनाव में राज्य में भाजपा को सभी 25 सीटें मिली थीं। पिछले साल भाजपा पंजाब में गुरदासपुर सीट हार गई थी। यह सीट भाजपा के विनोद खन्ना के निधन से रिक्त हुई थी।

20 सीटों पर हुए उपचुनाव

2014 के आम चुनाव के बाद लोकसभा की 20 सीटों के लिए उपचुनाव हुए हैं। इनमें भाजपा को केवल तीन सीटें मिली हैं। यह अलग बात है कि इनमें से अधिकतर सीटें भाजपा के पास नहीं थीं। इस साल छह लोकसभा सीटों के लिए उपचुनाव हुए जिनमें भाजपा एक पर भी नहीं जीती। ये उपचुनाव राजस्थान, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार में हुए। उत्तर भारत के इन राज्यों में बड़ी संख्या में लोकसभा की सीटें हैं। उपचुनावों में भाजपा की हार 2019 के आम चुनाव के लिए खतरे की घंटी है।

2014 के बाद हुए उपचुनाव

 साल--- क्षेत्र--- विजेता दल

2014--- मेडक--- टीआरएस

2014--- वडोदरा--- भाजपा

2014--- मैनपुरी--- सपा

2014---बीड--- भाजपा

2014---कंधमाल--- बीजद

2015--- बनगाव--- टीएमसी

2015--- वारंगल--- टीआरएस

2015--- रतलाम--- कांग्रेस

2016--- शहडोल--- भाजपा

2016--- तमलुक---टीएमसी

2016--- कूचबिहार---टीएमसी

2017--- मलप्पुरम--- आइयूएमएल

2017--- गुरदासपुर--- कांग्रेस

2017--- श्रीनगर--- जेकेएनसी

2018--- अलवर--- कांग्रेस

2018--- अजमेर--- कांग्रेस

2018--- उलबेरिया--- टीएमसी

2018--- गोरखपुर--- सपा

2018--- फूलपुर--- सपा

2018--- अररिया--- राजद

 

By Kishor Joshi