जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों से सतर्क भाजपा तत्काल 2019 की बड़ी लड़ाई की तैयारी में जुट गई है। छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में मिली हार की समीक्षा जरूर होगी, लेकिन उससे पहले आगे की राह का खाका तैयार कर लिया गया है और अपने सभी मोर्चो को एजेंडा भी दे दिया गया है। गुरुवार को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय पदाधिकारियों की बैठक में राष्ट्रीय परिषद की बैठक के साथ ही सभी सात मोर्चो के अधिवेशन की तिथि भी तय कर दी गई हैं। बैठकों का स्थान भी कुछ इस कदर तय हुआ है कि अहम राज्यों में सरकार की उपलब्धियों की चर्चा तेज हो और वहां के कार्यकर्ता सक्रिय हों।

11-12 जनवरी को दिल्ली से होगा भाजपा का चुनावी शंखनाद

यूं तो गुरुवार की बैठक नतीजों से पहले ही तय थी, लेकिन अटकल लगाई जा रही थी कि इस बैठक में नतीजों पर भी चर्चा होगी। भाजपा ने इस अटकल को खारिज कर दिया। सुबह भाजपा संसदीय पार्टी की बैठक में भी प्रधानमंत्री समेत किसी ने इसका जिक्र नहीं किया। हां, प्रधानमंत्री ने अटल बिहारी वाजपेयी, दिवंगत नेता अनंत कुमार और भोला सिंह का जिक्र करते हुए यह जरूर अपील की जनप्रतिनिधियों को जनता की सेवा में जुटना चाहिए।

राष्ट्रीय परिषद की बैठक

केंद्रीय पदाधिकारियों की बैठक भाजपा के महासचिव भूपेंद्र यादव ने बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि जनवरी 11-12 को दिल्ली में राष्ट्रीय परिषद की बैठक होगी। इसमें परिषद सदस्यों के ने अलावा सभी चुने हुए जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। जाहिर है कि लोकसभा चुनाव का डंका भाजपा वहीं से बजाएगी और हर प्रदेश से आने वाले नेताओं के हाथ में अगले चार पांच महीने की रणनीति का पूरा खाका होगा।

दो ढ़ाई महीने का खाका तैयार

भाजपा माइक्रो मैनेजमेंट के लिए जानी जाती है और इसी खातिर राष्ट्रीय परिषद से पहले ही मोर्चो की गतिविधि तेज हो जाएगी। 15-16 दिसंबर को युवा मोर्चा का अधिवेशन होगा। 21-22 दिसंबर को अहमदाबाद में महिला मोर्चा का अधिवेशन होगा जिसमें महिला मोर्चा कार्यकर्ताओं के साथ साथ पार्टी से जुड़ी केंद्रीय मंत्री से लेकर निचले स्तर की महिलाएं शामिल होंगी। दूसरे दिन बडी सभा का आयोजन भी किया जाएगा जिसे प्रधानमंत्री संबोधित करेंगे। इसी तरह नागपुर में 19-20 जनवरी को अनुसूचित जाति मोर्चा, 31 जनवरी से दिल्ली में दो दिवसीय अल्पसंख्यक मोर्चा, फरवरी 2-3 को एसटी मोर्चा, पटना में 15-16 फरवरी को ओबीसी मोर्चा और 21-22 फरवरी को उत्तर प्रदेश में किसान मोर्चा का सम्मेलन होगा। इनमें से कुछ सम्मेलनों में प्रधानमंत्री भी शामिल होंगे तो कुछ में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह व राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी जैसे बड़े चेहरे।

मकसद साफ है कि हाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा अलग अलग वर्गो से जुड़े जिन मुद्दों पर घिरी नजर आई, उसे पूरी स्पष्टता से जनता के सामने रखेगी। किसानों की ऋण माफी हाल के दिनों में चुनाव जिताऊ फार्मूला साबित होता जा रहा है।

हालांकि केंद्र सरकार ऐसे किसी फार्मूले के खिलाफ है। किसान मोर्चे की बैठकों के जरिए और फिर उनसे जुड़े नेताओं के जरिए जमीन तक किसानों से राय मशविरा भी होगा और उन्हें समझाया भी जाएगा। एससी एसटी विधेयक, ओबीसी आयोग जैसे मुद्दों पर भी सरकार के प्रयासों को व्यक्तिगत रूप से रखकर विपक्ष के आरोपों की धार को कुंद करने का प्रयास होगा।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव की घोषणा मार्च की शुरूआत में होगी। उससे पहले ही भाजपा अहम प्रदेशों में बैठकों के जरिए पूरे देश के मथना शुरू करेगी और उन्हीं बिंदुओं के आसपास लड़ाई की रणनीति तैयार होगी।

 

Posted By: Bhupendra Singh

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