जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मक्का मामले में एनआइए कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच एक जंग और छिड़ गई। भाजपा ने तत्काल याद दिलाई कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी बाटला हाउस और सिमी के लिए सहानुभूति रखते थे, लेकिन भगवा को आतंकवाद से जोड़ते रहे थे। इसका खामियाजा कर्नाटक मे भी भुगतना होगा। वहीं कांग्रेस ने ऐसे किसी शब्द से ही इनकार कर दिया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म या जाति से जोड़कर देखना गलत है। रोचक तथ्य यह है कि मक्का केस के बाबत कांग्रेस से गुलाम नबी आजाद ने जरूर एनआइए पर सवाल उठाया। लेकिन अध्यक्ष राहुल गांधी समेत किसी ने कोई बयान नहीं दिया।

असीमानंद समेत पांच आरोपियों के बरी किए जाने का फैसला राजनीतिक रूप से भी रोचक है। असर भी तत्काल दिखा। भाजपा आक्रामक हो गई। पार्टी प्रवक्ता सांबित पात्रा ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाया और पुराने इतिहास की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे और पी चिदंबरम ने कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में भगवा आतंकवाद शब्द का प्रयोग किया था। उन्होंने कांग्रेस से माफी की भी मांग कर दी।

राज्यसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और एमआइएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने जरूर जांच एजेंसी एनआइए पर सवाल उठाया और कहा कि एक एक कर सभी लोग छूट रहे हैं। लेकिन न तो कांग्रेस की औपचारिक बैठक में कोई सवाल उठा और न ही राहुल गांधी ने कोई ट्वीट किया। बल्कि अमेठी में सवाल पूछने के बावजूद राहुल ने असीमानंद की रिहाई पर कोई जवाब नहीं दिया। दूसरी ओर कांग्रेस प्रवक्ता पीएल पूनिया ने भगवा आतंकवाद के शब्द से इनकार करते हुए कहा कि कांग्रेस के किसी नेता ने ऐसा नहीं कहा है।

गौरतलब है कि चार महीने पहले ही गुजरात चुनाव के वक्त कांग्रेस और राहुल साफ्ट हिंदुत्व की राह पर चलते दिखे थे। कर्नाटक में भी वह लगातार मंदिरों का दर्शन कर रहे हैं। कर्नाटक चुनाव सिर पर है और कांग्रेस नहीं चाहेगी कि वह असीमानंद की रिहाई पर सवाल उठाकर फिर से घिरें।

By Tilak Raj