भोपाल,जेएनएन। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा के दो विधायक शरद कोल और नारायण त्रिपाठी को क्या तोड़ा, अल्पमत के नाम पर कमलनाथ सरकार को आंख दिखाने वाली बेफिक्र भाजपा अब खुद सहम गई है। अब अपने विधायकों की हिफाजत को लेकर फिक्रमंद हो गई है। सतर्कता का आलम यह है कि पार्टी विधायक भोपाल और मंत्रालय में क्या कर रहे हैं, इसकी जानकारी तक जुटाई जा रही है। हालांकि, खुद को भयमुक्त दिखाने के लिए पार्टी के बड़े नेता कह रहे हैं कि खेल की शुरुआत कांग्रेस ने की है, खत्म हम करेंगे, लेकिन कब और कैसे, इसकी कोई ठोस योजना किसी के पास नहीं है।

पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दो विधायकों के टूटने के दो दिन बाद उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में कांग्रेस द्वारा खेल शुरू करने वाली जो बात कही, लगभग वही बात घटना वाले दिन पार्टी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा भोपाल में कह चुके हैं। चौहान ने गोरखपुर में यह भी कहा कि हम सरकार गिराने में दिलचस्पी रखते तो इस सरकार का गठन ही नहीं होने देते। उनके मुताबिक, भाजपा ने कभी नहीं चाहा कि वह जोड़-तोड़ कर सरकार बनाए, लेकिन अब जब कांग्रेस इसकी शुरुआत कर चुकी है, तब भाजपा भी पीछे नहीं हटने वाली। दरअसल, कमलनाथ ने बुधवार को भाजपा नेताओं को जरा भी अहसास नहीं होने दिया और एक गैरजरूरी विषय पर मत विभाजन करवा कर भाजपा विधायक दल को ही एक तरह से विभाजित कर दिया।

देखो और इंतजार की नीति
कांग्रेस के पक्ष में वोट डालने वाले विधायकों के प्रति पार्टी का नरम रूख बताता है कि वह सुलह के दरवाजे बंद नहीं करना चाहती। दलबदल विधेयक के चलते ये दोनों विधायक कांग्रेस में तो शामिल हो नहीं सकते इसलिए दिल्ली के निर्देश पर इनकी मान मनौव्वल की कोशिशें जारी हैं। भाजपा यह भी जान रही है कि इन विधायकों को कांग्रेस का उच्च स्तरीय नेतृत्व तो खुशी-खुशी स्वीकार करेगा, लेकिन स्थानीय स्तर पर जमकर विरोध होना तय है। इसलिए देखो और इंतजार करो की नीति अपनाई जा रही है।

संतुलित बयानबाजी
दिल्ली से मिले निर्देशों के बाद अब पार्टी के तमाम बड़े नेता संतुलित बयानबाजी कर रहे हैं। पार्टी विधायकों की पहरेदारी बढ़ा दी गई है। कल तक सत्ता पक्ष के विधायकों के संपर्क का दावा करने वाले भाजपा नेता अब इस चिंता में हैं कि उसका कोई विधायक मुख्यमंत्री या कांग्रेस के किसी नेता से संपर्क स्थापित न कर ले। कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व मंत्री व विधायक संजय पाठक को गुरुवार को इसी शक में पार्टी मुख्यालय में तलब कर लिया गया था कि उनकी मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई है। आलाकमान ने स्थानीय नेतृत्व को यह भी कहा है कि वह विधायकों की शिकायतों को तवज्जो दे। इसलिए पिछले दो दिनों से संगठन महामंत्री सुहास भगत विधायकों की शिकायतें सुन रहे हैं।

घटनाक्रम शर्मनाक
पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. दीपक विजयवर्गीय ने कहा कि पिछले छह माह की असफलता को लेकर विपक्षी दल के नाते हम कांग्रेस को आंख दिखाते रहे हैं और आगे भी दिखाते रहेंगे। लेकिन, मप्र की विधानसभा में जिस तरह का खेल कांग्रेस ने शुरू किया है, वह अनपेक्षित तो है ही शर्मनाक भी है। पूरा घटनाक्रम हमारे लिए व्यापक आकलन और समीक्षा का विषय है।

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Posted By: Tanisk

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