दिसपुर,एएनआइ। असम के सिलचर पहुंचे बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानि एनआरसी पर फंसें पेंच पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि इस साल जुलाई के अंत तक एनआरसी बिल पेश किया जा सकता है। साथ ही राम माधव ने कहा कि इस बिल के पेश होने के बाद सिटिजनशिप (संसोधन) बिल लाने की भी तैयारी है। बीजेपी महासचिव राम माधव ने आगे कहा कि इस बिल के आ जाने के बाद देश में विदेशी अप्रवासियों से जुड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा।

 

बता दें एनआरसी का मुद्दा 2018 में तब गर्माया था, जब असम में रह रहे नागरिकों की पहचान के लिए  एनआरसी की सूची जारी की गई थी, जिसमें 40 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए थे। इसे लेकर राजनीतिक विवाद पैदा हो गया था।

जानें क्या है एनआरसी?

असम देश का इकलौता ऐसा राज्य है जहां राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की व्यवस्था लागू की गई है। एनआरसी में जिस व्यक्ति का नाम नहीं होता है उसे अवैध नागरिक माना जाता है। 1951 में की गई जनगणना के बाद इसे तैयार किया गया था। इसमें यहां के हर गांव में रहने वाले लोगों के नाम और संख्या दर्ज की गई। गौरतलब है कि इसमें उन सभी भारतीय नागरिकों को शामिल किया गया है, जो राज्य में 25 मार्च, 1971 के पहले से रह रहे हो। एनआरसी के जरिए ही असम में रह रहे लोगों की भारतीय नागरिकता का पता लगाया जाता है। 

दरअसल, साल 1947 में जब भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तब कुछ लोग असम से पूर्वी पाकिस्तान चले गए। लेकिन, उनकी जमीन असम में थी, इन लोगों का बंटवारे के बाद भी दोनों तरफ आना जाना जारी रहा। तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान और अब बांग्लादेश से असम में लोगों का अवैध तरीके से आने का सिलसिला जारी रहा। लोगों की इस अवैध आवाजाही के कारण वहां पहले से रह रहे लोगों को परेशानियां होने लगीं। जिसके बाद असम में विदेशियों का मुद्दा तूल पकड़ने लगा। तभी साल 1979 से 1985 के बीच 6 सालों तक असम में एक आंदोलन चला। तब यह सवाल उठा कि यह कैसे तय किया जाए कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन विदेशी।

Posted By: Atyagi.jimmc

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