राज्य ब्यूरो, कोलकाता। शिक्षक नियुक्ति घोटाले में बंगाल के पूर्व शिक्षा एवं उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें मंत्रिपद से हटा दिया है। इसके बाद उन्होंने मंत्रिमंडल में फेरबदल किया है। नौ नए चेहरों को मंत्री बनाया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की छवि साफ करने के लिए यह कदम उठाया है। लेकिन दूसरे दल से आए नेताओं को तरजीह देना पार्टी के लिए भारी भी पड़ सकता है।  

विश्लेषकों के मुताबिक ममता ने मंत्रिमंडल में प्रदीप मजुमदार को पंचायत व ग्रामीण विकास मंत्री के तौर पर शामिल किया है। यह बेहद समझदारी वाला कदम है। मजुमदार तृणमूल कांग्रेस के 2011 में बंगाल की सत्ता में आने के बाद से ही राज्य सरकार के प्रधान कृषि सलाहकार रहे हैं। उन्हें व्यापक अनुभव है और उनकी छवि भी बेदाग है इसलिए उन्हें मंत्री बनाया जाना सही दिशा में कदम है।

इसी तरह कृषि मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय को संसदीय कार्य विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जो इससे पहले पार्थ चटर्जी के अधीन था। शोभनदेव की छवि भी बहुत अच्छी है। पिछले चार दशकों के राजनीतिक करियर में उनपर कोई दाग नहीं लगा है। शोभनदेव 1998 में बंगाल विधानसभा में तृणमूल के पहले प्रतिनिधि भी थे।

सियासी विश्लेषकों का मानना है कि ममता का भाजपा छोड़कर तृणमूल में आए बाबुल सुप्रियो और फारवर्ड ब्लाक से नाता छोड़कर आए उदयन गुहा और ताजमुल हुसैन को मंत्रिमंडल में शामिल करने का फैसला तर्कसंगत नहीं दिख रहा। मंत्री बनाए जाने के बाद उदयन गुहा ने कहा था- 'मेरे पिता वाममोर्चा सरकार में मंत्री थे और मैं वर्तमान तृणमूल सरकार में मंत्री हूं। उदयन के पिता कमल गुहा वाममोर्चा सरकार में कृषि, कृषि विपणन और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री थे।'

सियासी विश्लेषकों का कहना है कि उदयन का यह बयान दर्शाता है कि मंत्री बनने की पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाना ही उनका एकमात्र उद्देश्य है। गौरतलब है कि उदयन ने ही राज्य विधानसभा में सीमा सुरक्षा बल के जवानों पर सीमावर्ती गांवों में महिलाओं का यौन उत्पीडऩ करने का आरोप लगाया था। बंगाल भाजपा के प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि ऐसे राजनेता मंत्री बनकर कैसे प्रभावी तरीके से काम करेंगे, यह साफ है।

इसी तरह ताजमुल के फारवर्ड में रहते 2011 से 2016 के दौरान तृणमूल सरकार की तरफ से ही कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे लेकिन 2016 के विधानसभा चुनाव से पहले उनके तृणमूल में शामिल होते ही उन सारे आरोपों को वापस ले लिया गया था। शमिक भट्टाचार्य ने सवाल किया कि अगर ताजमुल के खिलाफ दर्ज किए गए सारे आपराधिक मामले मान्य थे तो वे साफ छवि वाले व्यक्ति कैसे हो गए और उन्हें मंत्री बनाने के लिए कैसे विचार किया गया?

माकपा की केंद्रीय कमेटी के सदस्य राबिन देब ने कहा कि अन्य दलों के नेताओं को खुद से जोड़ने के लिए भाजपा राष्ट्रीय और तृणमूल राज्य स्तर पर रुपये और दबाव की समान नीति का अनुसरण कर रही है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनोज चक्रवर्ती ने कहा कि आसनसोल में हुए दंगे के समय उस समय वहां से भाजपा सांसद रहे बाबुल सुप्रियो पर तृणमूल ने इलाके में तनाव फैलाने का आरोप लगाया था। उस वक्त बाबुल ममता सरकार के खिलाफ लगातार बोलते थे। दरअसल मुख्यमंत्री को फिल्मी सितारों और गायकों से घिरे रहने में अच्छा लगता है बाबुल सुप्रियो अपने गाने से उन्हें मुग्ध कर सकते हैं। उन्हें मंत्री बनाने के लिए यही योग्यता काम आई है। 

Edited By: Krishna Bihari Singh

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