नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। मैं समझ रहा था कि कल हमने पार्लियामेंट में अच्छा बजट पेश किया है, उसके लिए आप मुबारकबाद देने आए हैं। लोग समझते थे कि बजट में ऐसा बोझ डाला जाएगा, लोगों का जीवन दूभर हो जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। हमें चिंता है, हमें फिक्र है कि किस तरह से देश में खुशहाली लाई जाए, किस तरह से देश में रहने वाले हर इंसान के लिए अच्छी जिंदगी का इंतजाम किया जाए।

....जहां तक पोखरण का सवाल है, हमने जो कुछ किया है, अपने बचाव के लिए किया है। किसी पर हमले के लिए नहीं किया है। 24 साल पहले 1974 में श्रीमती इंदिरा गांधी ने पोखरण में पहला आणविक विस्फोट किया था। 24 साल हम इंतजार करते रहे कि हमें विस्फोट की जरूरत नहीं पड़ेगी। दुनिया में जो परीक्षण हो रहे हैं, वे बंद हो जाएंगे। जो एटमी हथियार जमा किए जा रहे हैं, उनकी जमाखोरी रुकेगी और वे हथियार खत्म कर दिए जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैं आपको गिनाना नहीं चाहता कि पिछले 24 सालों में किन देशों ने कितने विस्फोट किए। हमें वे उपदेश देते रहे, अमन का पाठ पढ़ाते रहे और खुद तैयारी करते रहे। नए-नए हथियार बनाते रहे और पुराने हथियारों को पैना करते रहे। सारी दुनिया के लिए मुसीबत पैदा कर दी।

हमने जब देखा कि हमारे आसपास एटमी हथियार इकट्ठे हो रहे हैं, अमन के खतरे में पड़ने का डर है तो हमने फैसला किया कि हम अपने वैज्ञानिकों को, अपने साइंटिस्टों को, इंजीनियरों को इस बात की इजाजत दें कि वे मुल्क को इस लायक बना सकें, उस हद तक एटमी परीक्षण कर सकें, जिस हद तक हिंदुस्तान के बचाव के लिए और अमन को बनाए रखने के लिए जरूरी हो।

... पोखरण ने एक बार सारी दुनिया को झकझोर दिया, खासकर जो बड़े मुल्क हैं, वे सोचने को मजबूर हो गए हैं। यूनाइटेड नेशंस के सेक्रेटरी जनरल ने भी यह कहा कि न्यूक्लियर डिसार्मामेंट के बारे में फिर से सोचने की जरूरत है। हम एटमी निरस्त्रीकरण के हक में हैं। हम ऐसी दुनिया बनाना चाहते हैं, जिसमें एटमी हथियार न हों, लोगों का ध्यान रोजमर्रा की कठिनाइयों को कम करने की ओर लगे, देश में खुशहाली आए, हर एक के पास रोजगार हो, गरीबी और अमीरी की खाई पटे, सबको इंसाफ मिले, सबकी हिफाजत हो।

- (2 जून 1998 को प्रधानमंत्री निवास पर आम-जन को संबोधन) 

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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