नई दिल्ली,जागरण ब्यूरो। Arun Jaitley Passes Away देश के पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता अरुण जेटली दुनिया को अलविदा कह गए हैं। दिल्ली के एम्स में दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर आखिरी सांस ली। जेटली लंबे समय से बीमार थे। वह साफ्ट टिशू सरकोमा कैंसर से जूझ रहे थे। 9 अगस्त को सांस लेने में तकलीफ के बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था। करीब चार दशक से राजनीति सक्रिय थे।

इस बार जब मोदी सरकार सत्ता में आई तो उन्होंनें कैबिनेट में शामिल होने से मना कर दिया। स्वास्थ्य कारणों के चलते ही उन्होंने ये फैसला लिया। अपनी राजनीतिक सूझ बूझ से चर्चाओं में रहे अरुण जेटली ने मोटापे से छुटकारा पाने के लिए बैरिएट्रिक सर्जरी करवाई थी। इस कारण वह बहुत सुर्खियों में रहे। जेटली ही नहीं बल्कि कई बड़े वीआईपी ने इसका सहारा लिया है। 

आईये आपको बताते है आखिर क्या है बैरियाट्रिक सर्जरी 

वेट लॉस सर्जरी जिसे बैरियाट्रिक सर्जरी भी कहते हैं। इसमें पेट के हिस्से को बाइपास करके छोटा कर दिया जाता है। 

कब होती है बैरियाट्रिक सर्जरी की जरुरत 
जब किसी व्यक्ति के शरीर का   सामान्य बॉडी मास इंडेक्स यानी की BMI 32.5 kg/m2 हो जाता है, तब व्यक्ति को मोटापे की श्रेणी में रखा जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि किसी व्यक्ति के शरीर का सामान्य बॉडी मास इंडेक्स यानी की BMI व्यक्ति के वजन और हाइट का रेशियो 22.5 kg/m2 होता है। 

तीन तरह की होती है बैरियाट्रिक सर्जरी
बैरियाट्रिक सर्जरी भी तीन तरह की होती है। लैप बैंड, स्लीव गैस्ट्रिकटोमी और गैस्ट्रिक बाइपास सर्जरी। जो व्यक्ति लैप बैंड सर्जरी करवाते हैं उनकी खाने की क्षमता कम हो जाती है। 

स्लीव गैस्ट्रिकटोमी 

जब कोई व्यक्ति स्लीव गैस्ट्रिकटोमी सर्जरी का सहारा लेता है तो उसका वजन हर हफ्ते कम होने लगता है। 

गैस्ट्रिक बाइपास सर्जरी 
गैस्ट्रिक बाइपास में पेट को को बांटकर एक शेल्फ, गेंद के आकार का कर दिया जाता है। जब ये सर्जरी  हो जाती है तो व्यक्ति का खाना देर से पचना शुरु हो जाता है। इतना ही नहीं इसके बाद भूख बढ़ाने वाले हार्मोन ग्रेहलीन बनना बंद हो जाते है। शरीर में जमा फैट एनर्जी का काम करने लगता है और वजन तेजी से कम होने लगता है। 

इस सर्जरी में उन हार्मोन को हटा दिया जाता है। जो मोटापा बढ़ाने में मदद करते है। इस सर्जरी के बाद व्यक्ति को भूख लगना कम हो जाता है और महज एक साल के अंदर ही व्यक्ति का कम से कम 50 से 60 किलो वजन कम हो सकता है। 

कई बीमारियों से पीड़ित थे जेटली 
अरुण जेटली सिर्फ सॉफ्ट टिशू सरकोमा कैंसर से ही नहीं जूझ रहे थे। बल्कि इससे पहले भी उन्हें कई बीमारियां हो चुकी हैं।  वह डॉयबटीज से पीड़ित थे साथ ही उन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट भी करवाई थी। 

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Posted By: Ayushi Tyagi

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