जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सोहराबुद्दीन केस पर अदालत के फैसले पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की टिप्पणी का वित्तमंत्री अरुण जेटली ने करारा जवाब दिया है। अरुण जेटली ने राहुल गांधी को सही सवाल उठाने की सलाह दी और कहा 'सोहराबुद्दीन को किसी ने नहीं मारा' के बजाय उन्हें 'सोहराबुद्दीन केस की हत्या किसने की' पूछना चाहिए था। अदालत ने अपने फैसले में फर्जी मुठभेड़ के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि राजनेताओं को फंसाने के लिए जांच एजेंसी ने फर्जी कहानी गढ़ी थी।

दरअसल सोहराबुद्दीन शेख के फर्जी मुठभेड़ मामले में सभी 22 आरोपियों के बरी किए जाने पर कटाक्ष करते हुए राहुल गांधी ने ट्वीट किया था कि 'सोहराबुद्दीन को किसी नहीं मारा'। अरुण जेटली ने फेसबुक पर अपने ब्लॉग में इसका जवाब देते हुए बताया कि उन्होंने 2013 में ही विपक्ष के नेता के रूप में प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर आगाह किया था कि किस तरह सीबीआइ राजनेताओं को फंसाने के लिए फर्जी कहानी गढ़ रही है। जेटली ने कहा कि पांच साल में उस पत्र में लिखी सारी बातें सच साबित हुई।

अरुण जेटली ने मोदी सरकार में संस्थाओं की स्वायत्तता खत्म होने के कांग्रेस के आरोपों कटाक्ष करते हुए कहा कि सोहराबुद्दीन केस से साफ हो जाता है कि संप्रग सरकार के दौरान किस तरह जांच एजेंसी का दुरूपयोग किया जाता रहा है। जेटली ने कहा कि आरोपियों को बरी करने के आदेश से ज्यादा प्रासंगिक फैसले में अदालत की यह टिप्पणी है कि शुरुआत से ही जांच एजेंसी ने सच का पता लगाने के लिये पेशेवर तरीके से मामले की जांच नहीं की, बल्कि कुछ नेताओं की तरफ इसका रुख मोड़ने की कोशिश की।

जेटली ने कहा कि जिन लोगों ने हाल में संस्थाओं की आजादी को लेकर चिंता जताई थी, उन्हें गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिये कि जब वे सत्ता में थे तो उन्होंने सीबीआइ के साथ क्या किया था।

गौरतलब है सीबीआइ की विशेष अदालत ने सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले में सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में साफ कर दिया कि सोहराबुद्दीन गुजरात पुलिस के साथ असली मुठभेड़ में मारा गया था।

मनमोहन सिंह को लिखा था पत्र

उन्होंने आगे कहा, '27 सितंबर, 2013 को राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मैंने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को एक पत्र लिखा था, जिसमें सोहराबुद्दीन, तुलसी प्रजापति, इशरत जहां, राजिंदर राठौर और हरेन पंड्या मामलों में जांच के राजनीतिकरण का वर्णन किया था। जेटली ने मनमोहन सिंह को लिखे पत्र की कॉपी को भी अपने फेसबुक पोस्ट में शेयर किया।

उन्होंने लिखा कि अगले पांच वर्षों में मैंने पत्र में जो कुछ भी लिखा था, उसका हर एक शब्द सही साबित हुआ। यह इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस ने हमारी जांच एजेंसियों के साथ क्या किया।' कांग्रेस का घेराव करते हुए जेटली ने कहा कि जो लोग आज सीबीआइ की स्वतंत्रता को लेकर इतनी चिंता जता रहे हैं, उन्हें गंभीरता से आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि उन्होंने सत्ता में रहते हुए सीबीआइ के साथ क्या किया।

CBI अदालत ने सभी 22 आरोपियों को बरी किया
गौरतलब है कि 13 साल बाद बड़ा फैसला सुनाते हुए सीबीआइ की विषेश अदालत ने न सिर्फ सोहराबुद्दीन शेख-तुलसीराम प्रजापति एमकाउंटर मामले के सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया, बल्कि दोनों एनकाउंटर को फर्जी मानने से भी इन्कार कर दिया। अदालत ने सभी गवाहों और सबूतों को असंतोषजनकर करार देते हुए यह फैसला सुनाया।

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामला

  • 26, नवंबर 2005 को गुजरात ATS और राजस्थान STF ने कुख्यात गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख को अहमदाबाद के पास मार गिराया था।
  • इस एनकाउंटर के तीन दिन बाद उसकी पत्नी कौसर बी को भी मार गिराया गया।
  • इसके एक साल बाद 27 दिसंबर, 2006 को सोहराबुद्दीन के सहयोगी तुलसीराम प्रजापति को गुजरात और राजस्थान पुलिस ने गुजरात-राजस्थान सीमा के पास चापरी में मुठभेड़ में मार गिराया।
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद साल 2010 को मामला सीबीआइ को सौंप दिया गया।
  • CBI ने सुप्रीम कोर्ट में मांग की थी कि इस केस की सुनवाई गुजरात के बाहर की जाए। जिसे मानते हुए मामले को मुंबई ट्रांसफर कर दिया गया।
  • इस मामले में सीबीआइ अदालत में पेश हुए 45 गवाहों में से 38 अपने बयान से पलट गए थे।
  • सीबीआइ ने इस मुठभेड़ को फर्जी करार देते हुए अपने आरोपपत्र में 38 को नामजद किया। 16 को पहले ही सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
  • इनमें राजस्थान के तत्कालीन गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया, गुजरात पुलिस के पूर्व प्रमुख पीसी पांडे और गुजरात पुलिस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी डीजी वंजारा शामिल थे।
  • 21 दिसंबर को सीबीआइ की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया और एनकाउंटर को फर्जी मानने से भी इन्कार कर दिया।

Posted By: Nancy Bajpai

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस