जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। संसद द्वारा सवर्णों को दिये गये दस फीसद आरक्षण के बाद देश के वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने इसे ऐतिहासिक करार दिया। जेटली ने शुक्रवार को फेसबुक पर एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आर्थिक रूप से पिछड़े तबके के लोगों को दस फीसदी आरक्षण देना संविधान के मूल ढांचे के विपरीत नहीं है बल्कि सामान्य वर्ग के गरीबों को सबसे बड़ी मान्यता देने वाला कदम बताया है।

कांग्रेस कर रही खोखली बातें  
उन्होंने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह केवल खोखली बात कर रही है और उसने इस हफ्ते संसद में पारित संविधान संशोधन विधेयक का बेमन से समर्थन किया है। सोशल मीडिया पर साझा किये गये अपने लेख में वित्त मंत्री ने लिखा कि भारत में जाति को सामाजिक या ऐतिहासिक दमन का मुख्य कारक माना जाता है जैसा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के मामले में होता है अथवा उसे सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ेपन में कारक माना जाता है जैसा कि अन्य पिछड़ा वर्ग मामले में होता है।

गरीबी उन्मूलन की आवश्यकता पर जोर 
उन्होंने लिखा है कि गरीबी एक धर्मनिरपेक्ष मापदंड है और इसमें किसी भी समुदाय या धर्म का व्यक्ति हो सकता है। उन्होंने कहा कि गरीबी आधारित आरक्षण देने का प्रधानमंत्री का निर्णय सामान्य वर्ग के गरीबों को सबसे बड़ी मान्यता या उनके प्रति सरोकार को दर्शाता है और गरीबी उन्मूलन की आवश्यकता पर जोर देता है।

पांच वर्षों में एक बार भी टैक्स नहीं बढ़ाया
उन्होंने सरकार के अन्य कदम, जैसे हर गरीब ग्रामीण को घर देना, स्वास्थ्य योजना, आयुष्मान भारत और ब्याज में सब्सिडी देने जैसे उपायों की भी चर्चा की और गरीब और मध्यम वर्ग को मिलने वाले लाभों का जिक्र किया है। जेटली ने लिखा है कि मध्यम वर्ग को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पिछले पांच वर्षों के अपने कार्यकाल में एक बार भी टैक्स नहीं बढ़ाया है। यह पहली बार है जब मध्यम वर्ग के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से सरकार ने दो लाख करोड़ की सालाना कर में छूट दी है।

 

Posted By: Arun Kumar Singh