बेंगलुरू, एएनआइ। भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के फैसले पर एक नया बयान दिया है। जेपी नड्डा आज बेंगलुरू में एक देश एक संविधान पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को लेकर ये गलत धारणा थी कि यह कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देता है। उन्होंने कहा कि इतिहास में इसे झूठ लिखा गया है। उन्होंने कहा कि संविधान सभा में अनुच्छेद 370 के कोई प्रतिवादक नहीं थे। कोई भी इसपर विचार नहीं करना चाहता था।

इस गलतफहमी को फैलाने के लिए नड्डा ने पीडीपी और नेशनल कॉऩ्फ्रेंस के नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है। नड्डा ने कहा कि भारतीय संविधान में साफ लिखा है कि आर्टिकल 370 अस्थायी है और इसे बदला जा सकता है।

जेपी नड्डा ने बताया कि अनुच्छेद 370 को गोपालस्वामी आयंगर ने संविधान सभा में आगे रखते हुए कहा था कि 'अनुच्छेद 30 अस्थायी और संक्रमणकाली रहेगा।यह अनुच्छेद यह सुविधा प्रदान करेगा कि भारतीय संविधान के सभी कानून जम्मू कश्मीर में लागू हों।'

नड्डा ने साथ हीबताया कि जब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने शेख अब्दुल्ला को अनुच्छेद- 370 के बारे में तत्कालीन कानून मंत्री बीआर अंबेडकर को समझाने के लिए कहा, तो अंबेडकर ने उनसे कहा, आप चाहते हैं कि हम आपकी सीमाओं की रक्षा करें, भोजन और कनेक्टिविटी प्रदान करें लेकिन आप जम्मू और कश्मीर में भारतीयों के लिए नागरिकता अधिकार नहीं चाहते हैं। यह मेरे लिए अस्वीकार्य है।'

शाह का नेहरू पर निशाना

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाहलाल नेहरू को पीओके के लिए जिम्मेदार ठहराया है। मुंबई में एक सभा में बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि अगर नेहरू ने पड़ोसी देश(पाकिस्तान) के साथ अचानक युद्धविराम की घोषणा नहीं की होती तो आज पीओके का अस्तित्व नहीं होता। कश्मीर के गैर-एकीकरण पर नेहरू को निशाना बनाते हुए कहा कि उनकी जगह, देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को इस मुद्दे को सुलझाना चाहिए था।

Posted By: Shashank Pandey

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