नई दिल्‍ली, जेएनएन/एजेंसी। एक तरफ देश की रक्षा के लिए जवान सीमा पर शहीद हो रहे हैं, दूसरी तरफ उनकी शहादत पर सियासत हो रही है। हालांकि ऐसा करने वालों को सेना ने करारा जवाब दिया है। स्‍पष्‍ट रूप से कहा है कि शहीदों को धर्म के चश्‍मे से ना देखा जाए, क्‍योंकि उनका कोई धर्म नहीं होता है। गौरतलब है कि एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सुंजवां आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्‍होंने कहा था कि शहीद हुए सात जवानों में से पांच मुस्लिम थे।

सियासत करने वाले सेना को नहीं जानते

इस पर आज सेना की उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अनबू ने ओवैसी का नाम लिए बगैर कहा कि हम शहादत को सांप्रदायिक रंग नहीं देते। जो लोग इस तरह के बयान दे रहे हैं, वो सेना को अच्‍छे से नहीं जानते। लेफ्टिनेंट जनरल देवराज ने यह भी कहा कि दुश्‍मनों के हौसले पस्‍त हैं। जब वे सीमा पर नाकाम होते हैं तो कैंप पर हमले करते हैं।

'सात में से पांच शहीद कश्‍मीरी मुस्लिम'

अपने विवादित बयान में ओवैसी ने शहीदों का जिक्र करते हुए कहा था, 'सात में से पांच लोग जो मारे गए हैं, वे कश्मीरी मुस्लिम हैं। अब इसपर कुछ क्यों नहीं बोला जा रहा है।' वहीं यह भी कहा था, 'इससे उन लोगों को सबक लेना चाहिए, जो मुस्लिमों की वफादारी पर शक करते हैं और जो आज भी उन्हें पाकिस्तानी कह रहे हैं।'

ओवैसी ने जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ पीडीपी-भाजपा गठबंधन पर भी निशाना साधा था। उन्‍होंने कहा था कि दोनों मिलकर ड्रामा कर रहे हैं और बैठकर मलाई खा रहे हैं।

आतंकवाद के लिए सोशल मीडिया भी जिम्‍मेदार

लेफ्टिनेंट जनरल देवराज ने शहादत पर सियासत करने वालों को जवाब देने के साथ ही बढ़ते आतंकवाद के लिए सोशल मीडिया को भी जिम्‍मेदार ठहराया। उन्‍होंने कहा कि बढ़ते आतंकवाद के लिए सोशल मीडिया भी जिम्‍मेदार है। यह बड़े पैमाने पर युवाओं को आकर्षित कर रहा है और हमें इस मुद्दे पर ध्‍यान देने की जरूरत है। साथ यह भी स्‍पष्‍ट किया कि जो भी देश के खिलाफ खड़ा होगा, वह आतंकी है और हम उससे सख्ती से निपटेंगे।

आतंकियों की सूचना पर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

जम्‍मू-कश्‍मीर में सुंजवां सैन्य शिविर पर आत्मघाती हमले के बाद दोमाना में भी संदिग्ध आतंकी दिखने से सुरक्षा एजेंसिया सतर्क हो गई हैं। आशंका जताई जा रही है कि अगर जम्मू में और भी आतंकी छिपे हैं तो वे फिर से कोई हमला करने की कोशिश कर सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, दोमाना घटना के बाद पुलिस, सीआरपीएफ, सेना, एसएसबी, बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के अधिकारियों ने बैठक कर आतंकियों से निपटने के लिए रणनीति तैयार की। गत सोमवार को ही सभी को नई एडवाइजरी जारी की गई थी कि वे अपने शिविरों को किस प्रकार से सुरक्षित रख सकते हैं। बैठक में अधिकारियों ने सूचनाओं के आदान-प्रदान को मजबूत बनाने के साथ संदिग्ध लोगों की पहचान करने और उनकी धर-पकड़ को सुनिश्चित बनाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा की। 

Posted By: Pratibha Kumari