जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एनआरसी के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुकी ममता बनर्जी के साथ टकराव का एक और कारण सामने आ गया है। मिदनापुर में प्रधानमंत्री की रैली में पंडाल गिरने के लिए केंद्र की रिपोर्ट में राज्य प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया गया। रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री की रैली और उसकी तैयारियों के दौरान राज्य प्रशासन की ओर से गंभीर लापरवाही बरती गई। वहीं राज्य पुलिस ने हादसे में भाजपा की राज्य इकाई और पंडाल लगाने वाले फर्म को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ केस दर्ज किया है।

कैबिनेट सचिवालय में सुरक्षा अधिकारी एसके सिन्हा की अगुवाई में हादसे की जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने गृह सचिव राजीव गाबा को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री की रैली के दौरान वरिष्ठ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को रैली स्थल पर मौजूद होना चाहिए था, लेकिन कोई भी मौजूद नहीं था। यही नहीं, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए भी पर्याप्त बंदोबस्त भी नहीं किए गए थे। जाहिर है इससे पंडाल की क्षमता से अधिक लोग इसमें पहुंच गए थे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के लिए तैयार ब्लू बुक में नियम तय कर दिए गए हैं, लेकिन मिदनापुर में राज्य प्रशासन ने इन नियमों की अनदेखी की। सबसे बड़ी बात यह है कि पंडाल को स्थानीय प्रशासन में रैली के पांच दिन पहले ही स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट दे दिया गया था। जबकि रैली के ठीक पहले वहां भारी बारिश हुई थी। बारिश के मद्देनजर स्थानीय प्रशासन को पंडाल की स्टेबिलिटी की नए सिरे से जांच करनी चाहिए थे। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार से नए सिरे से जवाब तलब किया जाएगा और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा जाएगा। गृह मंत्रालय ने हादसे पर पहले ही राज्य से रिपोर्ट तलब कर ली थी। वहीं राज्य सरकार की ओर से हादसे के लिए भाजपा की राज्य इकाई और पंडाल लगाने वालों को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश पहले ही शुरू हो चुकी है। इस सिलसिले में स्थानीय पुलिस ने भाजपा की राज्य इकाई और पंडाल लगाने वाले के खिलाफ एफआइआर दर्ज जांच शुरू कर चुकी है। 

Posted By: Bhupendra Singh