जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कंधार विमान अपहरण पर राहुल गांधी के सवालों के लिए उन्हें आड़े हाथों लेते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार को कहा, कांग्रेस ने अगर मुद्दा छेड़ा ही है तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि 2010 में जब कांग्रेस सरकार थी, तब 28 मई को 25 दुर्दात आतंकियों को क्यों छोड़ा गया था? उस समय तो कोई ऐसी परिस्थिति भी नहीं थी जैसी कंधार विमान अपहरण के समय थी।

ब्लॉग के जरिये राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि जनता को गुमराह करने के लिए बार-बार कंधार विमान अपहरण का जिक्र किया जा रहा है। वह सवाल पूछ रहे हैं कि वाजपेयी सरकार ने मसूद अजहर को क्यों छोड़ा था। क्या यह वाकई अनुत्तरित सवाल था। कांग्रेस को क्या यह नहीं पता कि उस समय वाजपेयीजी ने इसे लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। जिसमें कांग्रेस की तरफ से तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मौजूद थे।

आज कांग्रेस और राहुल गांधी उस घटना पर सवाल उठाकर न सिर्फ असंवेदनशीलता का परिचय दे रहे हैं, बल्कि अपनी पार्टी नेताओं के विवेक पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। राहुल गांधी ने इस तरह का गैरजरूरी मुद्दा उठाकर इतिहास में हुई ऐसी रिहाइयों पर बहस छेड़ दी है जो खुद कांग्रेस के ऊपर सवाल खड़े करने वाली हैं। उन्होंने इस दौरान तत्कालीन गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के अपहरण का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें भी आतंकियों की रिहाई हुई थी।

आतंकवाद के मसले पर राहुल गांधी के बयानों के संदर्भ में अमित शाह ने कहा कि ऐसी बयानबाजी से पहले उन्हें कांग्रेस का इतिहास देखना चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि उन्होंने कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के समक्ष ले जाने और चीन को सुरक्षा परिषद का सदस्य बनाने की पैरवी कर बड़ी गलती की और देश आज तक इसकी सजा भुगत रहा है। जबकि पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायु सेना ने जैश-ए-मुहम्मद के बालाकोट स्थित आतंकी ठिकाने पर एयर स्ट्राइक कर जिस तरीके से पाकिस्तान और आतंकी सरगना मसूद अजहर पर दबाव बनाया, वह अभूतपूर्व है। पूरी दुनिया के सामने आज पाकिस्तान का चेहरा उजागर हुआ है। ऐसी स्थिति में देश के भीतर कांग्रेस और कुछ राजनीतिक दलों के नेता ऐसे सवाल उठा रहे हैं, जिससे आतंकियों को मदद मिल रही है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आतंकवाद, अलगाववाद और नक्सलवाद पर कांग्रेस की नीति सदैव ढुलमुल रही है।

 

Posted By: Sachin Bajpai

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