संजय मिश्र, नई दिल्ली। भाजपा के चुनाव दर चुनाव बढ़ते राजनीतिक ग्राफ के साथ-साथ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह भी सियासी कामयाबी के नये मानदंड स्थापित कर रहे हैं। त्रिपुरा की जीत के साथ ही शाह ने चार साल से भी कम समय में 14 राज्यों में भाजपा की सत्ता का परचम लहरा दिया है। इतना ही नहीं देश के करीब 75 फीसद भू-भाग पर भाजपा या एनडीए की सरकारें हैं। मोदी-शाह की अगुआई वाली भाजपा के चुनावी अश्वमेघ की इस तेज रफ्तार का आलम यह है कि कभी लगभग पूरे देश पर राज करने वाली कांग्रेस अब केवल देश के 8 फीसद भू-भाग तक ही सिमट कर रह गई है।

आबादी और 75 फीसद भूभाग पर भगवा परचम

वामपंथ के दूसरे अभेद्य गढ त्रिपुरा की जीत ने शाह को देश की चुनावी राजनीति का शहंशाह इसीलिए भी बना दिया है क्योंकि इस सूबे में भाजपा को लगभग शून्य से शिखर पर पहुंचाने की पूरी सियासी पटकथा उनकी अगुआई में बीते दो साल में लिखी गई। त्रिपुरा के पिछले विधानसभा में भाजपा मुख्य विपक्षी दल की हैसियत से भी कोसों दूर थी। मगर भाजपा अध्यक्ष की सियासी व्यूहरचना में त्रिपुरा का दूसरा वामपंथी दुर्ग तो ध्वस्त हुआ ही विपक्ष में रही कांग्रेस बिल्कुल हाशिये पर चली गई है।

2014 के बाद 14 राज्यों में भाजपा-एनडीए को दिलाई जीत

केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुआई में मई 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद अमित शाह ने राजनाथ सिंह से पार्टी अध्यक्ष की कमान संभाली थी। शाह के कमान संभालने के बाद हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव हुए। इन दोनों सूबों में भाजपा ने उनकी अगुआई में चुनावी कामयाबी का सफर शुरू किया। इसके बाद जम्मू-कश्मीर, झारखंड, असम, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में भाजपा को जीत दिलाते हुए सरकार बनवाई। जबकि शाह ने अपनी रणनीति से त्रिपुरा के साथ नगालैंड और मेघालय की कामयाबी ने पूर्वोत्तर भारत में भाजपा के सियासी पांव मजबूत करा दिये हैं।

2014 के बाद 14 राज्यों में भाजपा-एनडीए को दिलाई जीत

चार साल से भी कम समय में शाह की अगुआई में भाजपा की झोली में आयी इन राज्यों की सत्ता की वजह से देश के सियासी मिजाज का समीकरण ही नहीं मानचित्र भी बदल गया है। अब देश की 68.3 फीसद आबादी और 75 फीसद भू-भाग पर भाजपा-एनडीए का शासन है। इसकी तुलना में कांग्रेस की हालत बेहद पतली है और उसकी सरकारें देश की आबादी के केवल साढ़े सात फीसद लोगों तक सीमित हैं। भू-भाग के लिहाज से भी कांग्रेस का दायरा दो अंकों से नीचे आते हुए देश के केवल 8 फीसद इलाके तक सिमट गया है। कांग्रेस की सरकार अब कर्नाटक, पंजाब, मिजोरम और पुड्डूचेरी में ही रह गई है। जाहिर है भाजपा को कामयाबी की नई उंचाई पर ले जाने के मानदंड के साथ शाह कांग्रेस के लिए राजनीतिक नेपथ्य की भी राह तैयार कर रहे।

भाजपा और शाह की चुनावी कामयाबी के इस दौर में कांग्रेस के मुकाबले गैर कांग्रेसी दूसरी पार्टियां या क्षेत्रीय दलों की हालत फिर भी कुछ बेहतर है। पश्चिम बंगाल, दिल्ली, केरल, तेलंगाना और ओडिशा में इनकी सरकारें हैं और करीब 24.2 फीसद आबादी तथा 16.1 फीसद भूभाग पर इन दलों की सरकारे हैं।

 

Posted By: Kishor Joshi