बिलासपुर, एजेंसी। पूर्व मुख्यमंत्री व जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ सुप्रीमो अजीत जोगी के खिलाफ दर्ज एफआइआर पर रोक लगाने की मांग छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ठुकरा दी है। फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में जोगी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इस संबंध में पेश याचिका पर जस्टिस आरसीएस सामंत ने सिविल लाइन थाना में दर्ज अपराध को रद्द करने संबंधी याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। जोगी ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र संबंधी कराए गए एफआइआर को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर रोक लगाने की फरियाद की गई थी।

गौरतलब है कि जोगी की जाति का मामला लंबे अर्से से सुर्खियों में है। जाति छानबीन की हाईपावर कमेटी के निर्देश पर बिलासपुर कलेक्टर पी दयानंद ने जोगी के जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया था। तहसीलदार बिलासपुर के मार्फत सिविल लाइन थाना में भारतीय दंड विधान की धारा 420 के तहत अपराध पंजीबद्ध कराया गया है।

बता दें कि हाईपावर कमेटी ने अजीत जोगी की जाति की जांच-पड़ताल के बाद अपनी रिपोर्ट में उन्हें गैर आदिवासी बताया था। यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट भी भेजी गई थी। इसके बाद बिलासपुर कलेक्टर पी दयानन्द ने अजीत जोगी का आदिवासी होने संबंधी जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया।

इस बीच कलेक्टर द्वारा एफआइआर दर्ज नहीं कराए जाने संबंधी शिकायत होने पर राष्ट्रीय अनुसूचित जन जाति आयोग ने मामले को संज्ञान में लिया था। इसे लेकर बिलासपुर कलेक्टर को नोटिस जारी कर दिल्ली तलब किया गया था। इसके बाद एफआइआर अपराध दर्ज हुआ।

अजीत जोगी की दलील

हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की ओर से यह दलील दी गई थी कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जिस कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है वह 2013 से अस्तित्व में आया है। जबकि जोगी का जाति प्रमाण पत्र 1967 में बना था। इस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद स्थगन आदेश देने से इंकार कर दिया।

Posted By: Nitin Arora

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