नई दिल्‍ली, एएनआइ। 26 जनवरी को होने वाली किसानों की ट्रैक्‍टर रैली को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि वे (किसान) 26 जनवरी के बजाय किसी और दिन चुन सकते थे, लेकिन उन्होंने अब उन्‍होंने घोषणा कर दी है। बिना किसी दुर्घटना के शांतिपूर्वक ट्रैक्‍टर रैली आयोजित करना किसानों के साथ-साथ पुलिस प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय होगा। 

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि कृषि कानूनों को एक से डेढ़ साल के लिए निलंबित करने का सरकार का प्रस्ताव किसानों के लिए सबसे बढ़ि‍या पेशकश है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदर्शनकारी किसान यूनियनें इस पर जल्द ही पुनर्विचार करेंगी और अपने फैसले से सरकार को अवगत कराएंगी। सरकार और 41 किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच 11वें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही थी। दसवें दौर की वार्ता में सरकार ने नए कृषि कानूनों को एक से डेढ़ साल तक निलंबित रखने की पेशकश की थी, लेकिन किसान यूनियनों ने इसे खारिज कर दिया था।

सरकार ने यूनियनों से 11वें दौर की वार्ता में प्रस्ताव पर पुनिर्वचार करने और अपने निर्णय से अवगत कराने को कहा था। तोमर ने कहा, 'सरकार ने किसान यूनियनों को सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव दिया है। मुझे उम्मीद है कि वे आपस में चर्चा कर हमें अपने निर्णय से अवगत कराएंगे। एक बार उनके द्वारा इस बारे में अवगत कराए जाने पर हम इसे आगे बढ़ाएंगे।'

नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार किसान और कृषि दोनों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है। पीएम जी के नेतृत्व में विगत 6 वर्षों में किसान की आमदनी बढ़ाने, खेती को नई तकनीक से जुड़ने के लिए अनेक प्रकार की योजनाएं और प्रयास किए गए हैं। एमएसपी (MSP) को डेढ़ गुना करने का काम भी पीएम मोदी के नेतृत्व में हुआ।

कृषि मंत्री ने कहा कि किसान को उसके उत्पादन का सही दाम मिल सके, किसान महंगी फसलों की ओर आकर्षित हो सके इसलिए जहां कानून बनाने की आवश्यकता थी, वहां कानून बनाए गए और जहां कानून में बदलाव की आवश्यकता थी, वहां कानून में बदलाव भी किए गए। इसके पीछे सरकार और प्रधानमंत्री की साफ नीयत हैं।

यह पूछे जाने पर कि बजट सत्र के दौरान संसद में कृषि कानूनों पर सरकार विपक्ष के विरोध का किस तरह से सामना करेगी, तोमर ने कहा कि सरकार के लिए यह अच्छा बजट होगा। कोरोना के चलते अभी जो हालात है, उसको देखते हुए उन्हें उम्मीद है कि देश के लिए बजट बहुत अच्छा होगा। तोमर ने कहा कि सरकार किसानों को लेकर संवेदनशील है और 2022 तक उनकी आय दोगुना करने के लिए काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत में किसानों की अहम भूमिका है। इसलिए सरकार कृषि कानूनों को लेकर किसानों के हर भ्रम को दूर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कृषि कानूनों को लेकर चल रहा विरोध जल्द खत्म हो जाएगा।

समिति की बैठक कल

इस बीच, कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट गठित समिति 27 जनवरी को किसानों और किसान संगठनों के साथ दूसरे दौर की वार्ता करेगी।

ज्ञात हो कि गणतंत्र दिवस पर किसान ट्रैक्टर परेड में शामिल होने के लिए कई राज्‍यों से किसान दिल्‍ली पहुंच रहे हैं। परेड तीन जगहों से शुरू होगी, जिनमें सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर शामिल हैं। दिल्‍ली पुलिस ने ट्रैक्‍टर रैली के लिए तीन रूट पर करीब 170 किलोमीटर लंबी सड़क की अनुमति दी है। दिल्‍ली में आंदोलन कर रहे किसानों में सबसे ज्‍यादा संख्‍या पंजाब और हरियाणा के किसानों की है। ट्रैक्‍टर रैली में शामिल होने वहां से हजारों किसान और आ रहे हैं।

ट्रैक्‍टर्स पर तिरंगा लगाए, डीजे पर गाने बजाते ये किसान दिल्‍ली की तरफ कूच कर चुके हैं। वहीं यूपी और दिल्‍ली के बीच स्थित गाजीपुर बॉर्डर पर भी ट्रैक्‍टर लेकर पहुंचे किसानों का जमा होना जारी है। यहां उत्‍तराखंड और यूपी से आए किसान जमा हो रहे हैं।

 किसान नेता अपनी कार में ट्रैक्‍टर रैली में सबसे आगे चलेंगे। किसान नेताओं ने कहा कि प्रत्येक ट्रैक्टर पर तिरंगा लगा रहेगा और उस पर  लोक संगीत और देशभक्ति गीत बजेंगे। हर ट्रैक्टर पर केवल पांच लोगों के सवार होने की अनुमति रहेगी, लेकिन ट्रॉली नहीं जाएगी। नेताओं ने रैली में शामिल होने वालों से अपील की है कि वे अपने साथ 24 घंटे का राशन पानी पैक करके चलें। वे ठंड से बचाव का इंतजाम भी रखें। रैली में किसी भी पार्टी का झंडा नहीं लगेगा।

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