नई दिल्‍ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र के बीच नए कृषि कानूनों के विरोध में सियासत गरमा गई है। विपक्ष और किसान संगठन इन कानूनों को रद करने की मांग पर अड़े हुए हैं। वहीं सरकार का कहना है कि वह चर्चा के लिए तैयार है किसान संगठनों के पास ही इस मसले पर कोई प्रस्‍ताव नहीं है। सरकार ने कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी पर किसानों को गुमराह करने और देश में अराजकता का वातावरण बनाने का आरोप लगाया है।

दिलाई घोषणा पत्र की याद

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सोमवार कांग्रेस पर करारा पलटवार किया। उन्‍होंने कहा कि राहुल गांधी को गांव, गरीब, किसान के बारे में कोई अनुभव और दर्द नहीं है। राहुल गांधी को सोचना चाहिए कि जब आपने अपने घोषणापत्र में इन्हीं कानूनों (कृषि कानूनों) को लाने के लिए कहा था तो आप उस समय झूठ बोल रहे थे या आज झूठ बोल रहे हैं।

किसान यूनियन के पास ठोस प्रस्‍ताव नहीं

कृषि मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी किसानों को गुमराह करने और देश में अराजकता का वातावरण बनाने की कोशिश ना करें। उनकी इन्हीं आदतों और ऐसी हल्की समझ की वजह से वह कांग्रेस में भी सर्वमान्य नेता नहीं हैं। रही बात किसान यूनियन की तो उसके पास कोई प्रस्ताव नहीं है इसलिए वो चर्चा करने के लिए नहीं आ रहे हैं। भारत सरकार किसान यूनियन के साथ चर्चा करने के लिए तैयार है।

टिकैत ने आंदोलन के नए चरण का एलान किया 

वहीं किसान नेता राकेश टिकैत ने आंदोलन के नए चरण का एलान किया है। उन्‍होंने सोमवार को कहा कि आंदोलन आज से शुरू हो चुका है। हम पांच सितंबर को बड़ी पंचायत करेंगे। वहां से बड़ी बैठकों की घोषणा होगी। पहले पूरे प्रदेश में हम 18 बड़ी पंचायतें करेंगे उसके बाद ज़िलों में छोटी बैठकें करेंगे। लखनऊ को भी दिल्ली बनाया जाएगा। जिस तरह दिल्ली में चारों तरफ के रास्ते सील हैं वैसे ही लखनऊ में भी सील होंगे। हम इसकी तैयारी करेंगे...

ट्रैक्‍टर चला संसद तक पहुंचे राहुल 

इससे पहले राहुल गांधी नए कृषि कानूनों के विरोध में ट्रैक्टर चलाकर संसद भवन परिसर के गेट तक पहुंचे जिसके बाद पुलिस ने कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला, कांग्रेस सचिव प्रणव झा, श्रीनिवास बीवी और कई अन्य नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। राहुल गांधी के साथ ट्रैक्टर पर राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा, प्रताप सिंह बाजवा और पार्टी के कुछ अन्य सांसद बैठे थे। राहुल गांधी ने कहा कि नए कृषि कानून दो-तीन बड़े उद्योगपतियों के लिए लाए गए हैं। सरकार को इन कानूनों को वापस लेना पड़ेगा।