पुणे (प्रेट्र)। पुणे के उप-मेयर सिद्धार्थ धेंडे की अध्यक्षता वाली तथ्यान्वेषी समिति ने दावा किया है कि एक जनवरी को महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव गांव में हुई हिंसा पूर्व नियोजित थी और इसे दक्षिणपंथी कार्यकर्ता संभाजी बिदे और मिलिंद एकबोटे ने अंजाम दिया था।

धेंडे की अध्यक्षता वाली बहुसदस्यीय समिति ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट मामले की जांच कर रही पुणे की ग्रामीण पुलिस को सौंप दी। जबकि राज्य सरकार ने हिंसा की जांच के लिए दो सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया है। जबकि कई अन्य स्वतंत्र तथ्यान्वेषी समितियां भी इस हिंसा की जांच कर रही हैं। धांडे की अध्यक्षता वाली समिति भी इनमें से एक है।

एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी के मामले में सुनवाई

भीमा कोरेगांव कांड में पांच एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट बुधवार को अहम सुनवाई करेगा। सीजेआइ दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। बुधवार की सुनवाई में कोर्ट को तय करना है कि इन पांच एक्टिविस्ट को नजरबंद रखा जाए या पुलिस हिरासत में भेजा जाए।

पुणे पुलिस ने पांच एक्टिविस्ट को किया था गिरफ्तार
आपको बता दें कि भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच कर रही पुणे पुलिस ने मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद औऱ रांची में एक साथ छपेमारी कर तलाशी ली थी, जिसके बाद 5 लोगों को गिरफ्तार किया था। पुणे पुलिस के मुताबिक सभी पर प्रतिबंधित माओवादी संगठन से लिंक होने का आरोप है, वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता इसे सरकार के विरोध में उठने वाली आवाज को दबाने की दमनकारी कार्रवाई बता रहे हैं। रांची से फादर स्टेन स्वामी, हैदराबाद से वामपंथी विचारक और कवि वरवरा राव,फरीदाबाद से सुधा भारद्धाज और दिल्ली से सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलाख की गिरफ्तारी हुई है।

Posted By: Arti Yadav