इंदौर, पीटीआइ। मध्य प्रदेश में भाजपा के लगभग 80 मुस्लिम नेताओं ने शुक्रवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने नागरिकता कानून को विभाजनकारी तरीका बताया है।

इस्तीफा देने वाले नेताओं में से एक राजिक कुरैशी फारशीवाला ने कहा कि लगभग 80 मुस्लिम सदस्यों ने गुरुवार को नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

धार्मिक आधार पर लिया गया फैसला

भाजपा छोड़ने वाले मुस्लिम नेताओं ने सीएए को धार्मिक आधार पर लिया गया विभाजनकारी फैसला करार दिया है। इन नेताओं में भाजपा के अल्पसंख्यक इकाई के कई पदाधिकारी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2019 में जबसे सीएए आया है, तबसे हमारे समुदाय के कार्यक्रमों में भाग लेना हमारे लिए कठिन होता जा रहा था। लोग हमसे पूछते है कि सीएए जैसे विभाजनकारी कानून पर हम कब तक चुप रहेंगे।

हर समुदाय के लोगों को मिलनी चाहिए भारतीय नागरिकता

फारशीवाला ने आगे कहा कि हर समुदाय के उत्पीड़ित शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिलनी चाहिए। आप यह तय नहीं कर सकते हैं कि एक विशेष व्यक्ति केवल धर्म के आधार पर एक घुसपैठिया या आतंकवादी है।

संविधान की मूल भावना के विरुद्ध

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में मुस्लिम नेताओं ने कहा, 'भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत नागरिकों को समानता का अधिकार है, लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार धार्मिक आधार पर सीएए को लागू कर रही है। यह देश को विभाजित करने और संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है।

कैलाश विजयवर्गीय के करीबी भी

बता दें कि इस्तीफा देने वाले कुछ नेताओं को भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का करीबी माना जाता है। इसके बारे में पूछे जाने पर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मुझे मामले की जानकारी नहीं है, लेकिन अगर किसी व्यक्ति को सीएए को लेकर हुमराह किया जाएगा तो हम उसे इसके बारे में बताएंगे।

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