नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। भारी हंगामे के कारण बार-बार बाधित होता संसद का मानसून सत्र चार दिन पहले ही समाप्त हो गया। अपने कार्यकाल के अंतिम सत्र के कामकाज का ब्यौरा देते हुए राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने बताया कि हंगामे के कारण सदन का 47 घंटे बर्बाद हो गया। वहीं 17वीं लोकसभा का नौवां सत्र में अन्य सत्रों के मुकाबले सबसे कम कामकाज हुआ।

18 जुलाई से शुरू हुआ मानसून सत्र 12 अगस्त तक चलना था। चार दिन पहले सत्रावसान की वजह इस हफ्ते आने वाले त्यौहारों को बताया जा रहा है। मानसून सत्र की शुरूआत ही हंगामेदार रही। एक ओर विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, अग्निपथ योजना जैसे कई मुद्दों पर चर्चा की मांग पर अड़ा रहा, तो वहीं सत्ता पक्ष की ओर से चर्चा के लिए सदन में शांति को जरूरी बनाए रखने की शर्त रखी गई।

सदन के भीतर असंसदीय व्यवहार के लिए राज्यसभा में विपक्ष के 23 सदस्यों को एक हफ्ते के लिए और लोकसभा में चार विपक्षी सदस्यों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। बाद में लोकसभा में प्लेकार्ड नहीं दिखाने की शर्त पर उनका निलंबन वापस लिया गया। खास बात यह रही कि दो हफ्ते तक संसद सत्र पूरी तरह धुल जाने के बाद अंतत: महंगाई के मुद्दे पर दोनों सदनों में चर्चा हुई। मानसून सत्र के समय से पहले अवसान को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला।

डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि यह लगातार सातवां सत्र है जिसका समय से पहले अवसान किया गया है। राज्यसभा में विदाई समारोह के बाद समय से पहले सत्र के अवसान का ऐलान करते हुए वेंकैया नायडू ने बताया कि सत्र का 47 घंटे बर्बाद होने के कारण सदस्य अहम मुद्दों को उठाने में विफल रहे। उन्होंने कहा कि इस सत्र में कुल 235 तारांकित प्रश्न पूछे गए, लेकिन उनसले केवल 161 का ही जवाब दिया जा सका।

सदस्यों ने केवल 25 मुद्दे उठाये और 60 मामलों का विशेष उल्लेख किया। यही नहीं, एक भी निजी विधेयक चर्चा के लिए नहीं लिया जा सका। वहीं केवल पांच सरकारी विधेयक ही पास हो सका। वहीं कामकाज की दृष्टी से 17वीं लोकसभा में नौवां सत्र सबसे खराब रहा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अनुसार इस सत्र में सरकार की ओर से लोकसभा में केवल सात विधेयक पेश किये गए और छह पास कराए गए।

इसके पहले सातवें सत्र यानी पिछले साल के शीतकालीन सत्र में 12 विधेयक पेश और नौ पास किये गए थे। लोकसभा चलने के मामले में भी यह पिछले साल के मानसून सत्र की तुलना में ही बेहतर रहा। पिछले मानसून सत्र में केवल 21.21 घंटे ही लोकसभा की बैठक हुई थी, जबकि इस बार 44.29 घंटे तक बैठक हुई।

Edited By: Ashisha Singh Rajput