जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए सरकार ने इससे निपटने की अब एक देशव्यापी योजना बनाई है। इसके तहत अगले पांच सालों में प्रदूषण के स्तर को करीब 30 फीसद तक कम करने का दावा किया गया है। फिलहाल इस मुहिम के पहले चरण में दिल्ली सहित देश के 102 उन प्रदूषित शहरों को शामिल किया गया है, जो पिछले कुछ सालों से प्रदूषण की सबसे ज्यादा चपेट में है। इनमें उत्तर प्रदेश के भी 15 शहरों को शामिल किया है।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने गुरूवार को प्रदूषण से निपटने के लिए नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) नाम से यह योजना लांच की है। इसके तहत इन सभी शहरों में प्रदूषण से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। खासबात यह है कि प्रदूषण में कमी का यह आंकलन 2017 में हवा की गुणवत्ता के आधार पर होगा।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. हर्षव‌र्द्धन ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि योजना के तहत राज्यों को वित्तीय मदद भी मुहैया कराई जाएगी। अगले दो सालों में उन्हें तीन सौ करोड़ रुपए दिए जाएंगे। राज्यों से इस साल की वित्तीय मदद उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव मांगे गए है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सहित देश के इन 102 शहरों में जिस तरह से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा था, उसके चलते लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि इन शहरों का चयन विश्व स्वास्थ्य संगठन और प्रदूषण के बढ़े स्तर को लेकर जारी होने वाली रिपोर्ट के आधार पर किया गया है। वहीं इस योजना के तहत इन सभी शहरों में निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने की बात कही गई है। अभी इनमें से सिर्फ 70 शहरों में ही वायु प्रदूषण को जांचने की व्यवस्था है। इनमें से कुछ शहरों में इसका आंकलन मैनुअल तरीके से ही किया जाता है।

उत्तर प्रदेश के यह शहर है शामिल
केंद्र सरकार ने प्रदूषण से निपटने की इस मुहिम में उत्तर प्रदेश के 15 शहरों को शामिल किया है। इनमें आगरा, इलाहाबाद, अनपरा, बरेली, फिरोजाबाद, गजरौला, झांसी, गाजियाबाद, कानपुर, खुर्जा, लखनऊ, मुरादाबाद, नोयडा, रायबरेली और वाराणसी शामिल है। इसके अलावा उत्तराखंड के सिर्फ दो शहर (काशीपुर और ऋषिकेश) शामिल किए गए है। वहीं बिहार के सिर्फ तीन शहरों को (पटना, गया और मुजफ्फरपुर) शामिल किया गया है।

Posted By: Ravindra Pratap Sing

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