वाशिंगटन, प्रेट्र : रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिका के रक्षा मंत्री जिम मैटिस से मुलाकात की और इस दौरान भारत और अमेरिका रक्षा तथा सुरक्षा संबंध तेजी से आगे बढ़ाने के लिए सहमत हुए हैं। मुलाकात में मैटिस ने भारत को पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र तथा विश्व भर में 'स्थायित्व प्रदान करने वाली ताकत' बताया। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने अपने भारतीय समकक्ष के साथ पेंटागन में इस साल चौथे दौर की बैठक में सीतारमण का स्वागत किया। भारतीय रक्षा मंत्री अमेरिका की पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। यहां से वह कैलिफोर्निया में रक्षा मंत्रालय के डिफेंस इनोवेशन यूनिट तथा हवाई में हिंद प्रशांत कमान मुख्यालय जाएंगी।

मैटिस ने विगत सोमवार को सीतारमण का पेंटागन में दोनों नेताओं के लिए हुई प्रतिनिधि स्तर की बैठक में स्वागत करते हुए कहा, 'अमेरिका और भारत ने प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) के शब्दों में, अतीत से चली आ रही हिचकिचाहटों को दूर किया, दोनों देशों ने मित्रता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए यह स्पष्ट किया कि सामरिक स्वायत्तता और सामरिक साझेदारी के बीच, कहीं कोई विरोधाभास नहीं है।'पहली बार वाशिंगटन डीसी पहुंची रक्षा मंत्री सीतारमण से मुलाकात के दौरान जिम मैटिस ने विश्वास जताया कि भारत और अमेरिका मिलकर रूस से एस-400 वायु रक्षा प्रणाली खरीदने पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों के मुद्दे को सुलझा लेंगे। उल्लेखनीय है कि विगत अक्टूबर में भारत ने रूस से 5000 अरब डॉलर की रक्षा प्रणाली का सौदा करके अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा मोल ले लिया है। मैटिस ने कहा कि विश्व के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों ने अपने बीच भिन्न संस्कृति तथा भिन्न इतिहास होने के बावजूद नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए सिद्धांतों, मूल्यों और सम्मान को साझा किया है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका-भारत संबंध विश्व के प्राचीनतम और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के बीच स्वाभाविक साझेदारी है। उन्होंने कहा, 'सितंबर में आपके देश की मेजबानी में नई दिल्ली में टू प्लस टू मंत्री स्तरीय वार्ता होने के बाद खास तौर पर अमेरिका भारत रक्षा सहयोग में हमने सार्थक प्रगति की है। क्षेत्र में और पूरी दुनिया में शांति और सुरक्षा को आगे बढ़ाने में और इसके लिए एक स्थिरताकारक ताकत के तौर पर भारत के नेतृत्व की अमेरिका सराहना करता है।' अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा, 'आज हम सितंबर में हुए कम्यूनिकेशंस कम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (सीओएमसीएएसए) समझौते को लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं।' सितंबर में दोनों देशों ने सीओएमसीएएसए पर हस्ताक्षर किए थे जो भारत को आधुनिक सैन्य हार्डवेयर प्राप्त करने की अनुमति देता है।

सीतारमण ने टू प्लस टू बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक विचार-विमर्श का आधार तैयार हुआ। नई अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को जो महत्व दिया गया उससे वह उत्साहित हैं। भारत अमेरिका को रक्षा के क्षेत्र में अहम साझेदार के रूप में देखता है।' साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर सहयोग है, इसके अलावा रक्षा, वैज्ञानिक, सह-विनिर्माण और सह-विकास तथा औद्योगिक स्तर पर भी सहयोग का स्तर अच्छा है। 

 

Posted By: Vikas Jangra