जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। यूक्रेन को लेकर रूस और अमेरिका के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। एक दिन पहले अमेरिकी सरकार की यह चेतावनी कि रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला करने को तैयार है, से हालात और बिगड़ गए हैं। ऐसे में भारत न सिर्फ समूचे हालात पर पैनी नजर बनाये हुए है बल्कि अपने दोनों रणनीतिक सहयोगी देशों अमेरिका और रूस के साथ सीधे संपर्क में है।

प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका

बुधवार को देर रात विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला की अमेरिका की उप विदेश मंत्री वेंडी शरमन के साथ हुई टेलीफोन वार्ता में इस बारे में विस्तार से बात होने की सूचना है। वहीं रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने मास्को में भारत के राजदूत पवन कपूर से मुलाकात कर पूरे हालात की जानकारी दी है। रूस और अमेरिका के बीच सीधे युद्ध होने की स्थिति में भारत के हितों पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

सीमा पर बढ़ा जमावड़ा 

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि शरमन व श्रृंगला के बीच हुई बातचीत में यूक्रेन की सीमा पर रूसी सैनिकों के बढ़ते जमावड़े से उपजी स्थिति पर भी चर्चा हुई।

कई मुद्दों पर बात  

हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी में इसका जिक्र नहीं है। इसमें बताया गया है कि इस टेलीफोन वार्ता में हिंद-प्रशांत क्षेत्र, मध्य पूर्व क्षेत्र, भारत के पड़ोसी देशों के हालात व कोरोना को लेकर सहयोग जैसे मुद्दों पर बात हुई। अमेरिकी उप विदेश मंत्री के साथ भारतीय विदेश सचिव का विमर्श ठीक उस दिन हुआ है जिस दिन अमेरिका के विदेश मंत्री यूक्रेन की यात्रा पर हैं।

नहीं निकल पाया हल 

भारतीय विदेश सचिव और मास्को में भारतीय राजदूत से मुलाकात कर जानकारी देने वाले दोनों अमेरिकी व रूसी उप विदेश मंत्रियों के बीच हाल ही में यूक्रेन सीमा पर उपजी स्थिति से निपटने को लेकर मैराथन बैठक हुई थी। हालांकि इसका कोई सकारात्मक हल नहीं निकल सका और रूस की तरफ से यूक्रेन की सीमा व बेलारूस में लगातार अपनी फौज व साजो-समान भेजे जा रहे हैं।

अमेरिका दे चुका है चेतावनी 

रूस और अमेरिका मौजूदा विवाद का राजनयिक हल निकालने की संभावना को अभी खारिज भी कर रहे हैं। राष्ट्रपति जो बाइडन यहां तक कह चुके हैं कि अगर रूस ने हमला किया तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। जहां तक भारत की भावी रणनीति का सवाल है तो भारत रूस और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव में किसी एक देश के समर्थन में उतरने से पूरी तरह से परहेज करेगा।

दोनों देशों के बीच बढ़ रहा तनाव 

खास तौर पर तब जब चीन के साथ भारत के तनावग्रस्त रिश्तों में कोई कमी होती नहीं दिख रही है। मौजूदा परिदृश्य में भारत के लिए रूस के साथ अमेरिका भी महत्वपूर्ण हैं। लेकिन यह भी माना जा रहा है कि अमेरिका भारत पर रूस के साथ रिश्तों की समीक्षा करने का दबाव बढ़ा सकता है।

प्रतिबंधों का होगा भारत पर असर

अगर अमेरिका की तरफ से रूस पर और ज्यादा कड़े प्रतिबंध लगाये जाते हैं तो इसका असर भी भारत पर पड़ेगा क्योंकि रूस अभी भी भारत के 60 फीसद सैन्य साजो समान की आपूर्ति करता है। अभी भी रूस से एस-400 एंटी मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए भारत को अमेरिका के जबरदस्त दबाव का सामना करना पड़ रहा है। 

Edited By: Krishna Bihari Singh