वाशिंगटन, आइएएनएस। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक और बयान से सबको हैरान कर दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अगर वह चाहें तो अफगानिस्तान को 10 दिनों में दुनिया से मिटाकर वहां 19 वर्षो से चल रहे युद्ध को खत्म कर सकते हैं, लेकिन वह एक करोड़ लोगों को मारना नहीं चाहते हैं, इसलिए बातचीत से इस मसले को सुलझानें की कोशिशों में लगे हैं। ट्रंप की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए अफगानिस्तान ने अमेरिकी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।

ट्रंप ने अपने ओवल ऑफिस में सोमवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ बातचीत में यह टिप्पणी की। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पिछले 19 वर्षो से अफगानिस्तान में एक पुलिस की भूमिका निभा रहा है फौजी की नहीं। अगर अमेरिका वहां फौजी की भूमिका में होता तो अफगानिस्तान कब का खत्म हो चुका होता।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अफगानिस्तान से निकलना चाहता है। इसलिए वहां युद्ध खत्म करने के लिए राजनीतिक समाधान के लिए तालिबान समेत विभिन्न पक्षों से बातचीत कर रहा है। अमेरिका और तालिबान के बीच आठवें दौर की बातचीत कतर के दोहा में होने वाली है, जिसके लिए ट्रंप के प्रतिनिधि खलीलजाद मंगलवार को काबुल पहुंचे।

खान के साथ बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि अफगानिस्तान में युद्ध खत्म करने और वहां शांति बहाली में पाकिस्तान अहम भूमिका निभाएगा।

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने मांगा स्पष्टीकरण
ट्रंप के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ घनी ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका के साथ उनके देश के बहुपक्षीय संबंध हैं। इसको देखते हुए अमेरिका को ट्रंप के बयान पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।

राष्ट्रपति घनी के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि अफगान सरकार देश में शांति बहाली की प्रक्रिया में अमेरिका के प्रयासों का समर्थन करती है। लेकिन यह भी साफ करती है कि अफगान सरकार को दरकिनार कर कोई विदेशी राष्ट्राध्यक्ष अफगानिस्तान के लोगों के भाग्य का फैसला नहीं कर सकता है।

अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय के पूर्व प्रमुख और राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी रहमतुल्ला नबील ने ट्वीट कर कहा कि ट्रंप एक करोड़ लोगों की मौत का बहाना बनाकर अमेरिका के लोगों को मूर्ख ना बनाएं। अमेरिका अगर पाकिस्तान के क्वेटा में शरण लिए तालिबान के शीर्ष 15-30 आतंकियों को मार गिराए और पाकिस्तान के 15-30 से सैन्य अफसरों पर पाबंदी लगा दे तो समस्या सुलझ जाएगी।

बता दें कि अफगानिस्तान अपने यहां आतंकी घटनाओं और तालिबान को समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराता रहा है।

सोशल मीडिया पर गुस्सा
ट्रंप के बयान पर अफगानिस्तान के लोगों ने सोशल मीडिया पर गुस्सा उतारना शुरू कर दिया है। फेसबुक पर मोहम्मद फरहाद ने लिखा है, 'मैं स्तब्ध, डरा हुआ और अपमानित महसूस कर रहा हूं। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हमने अमेरिका पर भरोसा किया, और अब राष्ट्रपति ट्रंप हमें नरसंहार की धमकी दे रहे हैं।'

फेसबुक पर नदीन गौरी ने लिखा है,'मुझे यकीन नहीं हो रहा ट्रंप ने ऐसा कहा है। मैं जानता हूं उन्होंने ही यह कहा है लेकिन मैं अब भी स्तब्ध हूं।'

Posted By: Sanjeev Tiwari

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