नई दिल्‍ली। पाकिस्‍तान को ग्रे लिस्‍ट में बनाए रखने, बाहर निकालने या फिर उसको ब्‍लैकलिस्‍ट करने को लेकर 16 फरवरी को फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स (Financial Action Task Force/FATF) की एक अहम बैठक फ्रांस में होने वाली है। इस बैठक में पाकिस्‍तान ने बीते तीन माह के दौरान आतंकवाद को हो रही फंडिंग रोकने के लिए क्‍या कदम उठाए हैं उसको देखते हुए फैसला होगा। इस बैठक में जहां भारत का जोर पाकिस्‍तान की सच्‍चाई को उजागर करते हुए उसको ब्‍लैकलिस्‍ट कराने पर होगा, वहीं पाकिस्‍तान का जोर खुद को ब्‍लैकलिस्‍ट से बचाने के लिए होगा। लेकिन, समाचार एजेंसी रॉयटर के मुताबिक पाकिस्‍तान को ब्‍लैकलिस्‍ट कराने के भारत के मंसूबे पर चार देश पानी फेर सकते हैं। इनमें तुर्की, मलेशिया, सऊदी अरब और चीन का नाम शामिल है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि एफएटीएफ ने ईरान और उत्‍तर कोरिया को काली सूची में डाला हुआ है, जिसकी वजह से ये देश आर्थिक संकट को झेल रहे हैं। 

सऊदी अरब का साथ देना मजबूरी 

इनमें से तुर्की मलेशिया और चीन वो देश हैं जिन्‍होंने कश्‍मीर के मुद्दे पर भी पाकिस्‍तान का साथ दिया है। सऊदी अरब ने इस मुद्दे पर पाकिस्‍तान का साथ तो नहीं दिया है लेकिन इस मंच पर वो पाकिस्‍तान का साथ देता रहा है। इसकी वजह सबसे बड़ी सऊदी अरब का पाकिस्‍तान में हुआ अरबों डॉलर का निवेश है। पाकिस्‍तान के कालीसूची में डाले जाने के बाद सऊदी अरब का ये निवेश बेकार हो जाएगा और इसकी वापसी की उम्‍मीद भी काफी कुछ खत्‍म हो जाएगी। इसके साथ ही वहां पर निवेश के सारे रास्‍ते बंद हो जाएंगे। ऐसे में पाकिस्‍तान के साथ सऊदी अरब भी आर्थिकतौर पर नुकसान झेलने को मजबूर होगा। लिहाजा इस मंच पर पाकिस्‍तान का साथ देना सऊदी अरब के लिए जरूरत से ज्‍यादा मजबूरी बन चुका है। 

तुर्की देगा पाकिस्‍तान का साथ 

तुर्की के राष्‍ट्रपति रैसप तैयप इर्दोगन ने अपने पाकिस्‍तान यात्रा के दौरान यह साफ कर दिया है कि वह एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्‍तान को ब्‍लैकलिस्‍ट (Blacklist Pakistan) करने के किसी भी फैसले का विरोध करेगा। इतना ही नहीं इर्दोगन ने यहां तक कहा है कि इस बैठक में वह अपने राजनीतिक दबाव पूरा इस्‍तेमाल करेगा। आपको बता दें कि उन्‍होंने ये बयान 13 फरवरी को पाकिस्‍तान की यात्रा पर इस्‍लामाबाद पहुंचने के बाद दिया है। खुद इमरान खान तुर्की के राष्‍ट्रपति को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे थे।   

ये होती है एफएटीएफ की प्रक्रिया 

रॉयटर के मुताबिक किसी भी देश को ब्‍लैकलिस्‍ट होने से बचाने के लिए संस्‍था के किन्‍हीं सदस्‍य देशों के तीन वोट चाहिए होते हैं। यदि ये वोट उन्‍हें मिल जाता है तो उस देश को काली सूची में नहीं डाला जा सकता है। आपको ये भी बता दें कि पाकिस्‍तान को एफएटीएफ ने फिलहाल ग्रे लिस्‍ट में डाला हुआ है। यदि पाकिस्‍तान को इस सूची में डाल दिया जाता है तो उसपर कई तरह के वित्‍तीय प्रतिबंध लग जाएंगे जो उसकी बदहाल होती वित्‍तीय अर्थव्‍यवस्‍था को और खराब कर देंगे।   

कितने दिशा-निर्देश हुए पूरे 

आपको यहां पर ये भी बता दें कि एफएटीएफ की पहले हुई बैठक में जो समीक्षा हुई थी उसके मुताबिक पाकिस्‍तान को बताए गए 40 दिशा-निर्देशों में से वो केवल एक को ही पूरी तरह से कर पाया था। इसके अलावा 9 पर वह काफी कुछ कर चुका था। 26 दिशा-निर्देश ऐसे थे जो आंशिकतौर पर ही हुए थे और चार ऐसे थे जिन्‍हें पूरा करना बेहद जरूरी था लेकिन उन पर कोई काम ही नहीं हुआ था। जहां तक अगले माह होने वाली ली बैठक का प्रश्‍न है तो पाकिस्‍तान बार-बार ये कह रहा है कि उसने एफएटीएफ के बताए निर्देशों को पूरा किया है।  

पाकिस्‍तान का दावा 

पाकिस्‍तान का ये भी कहना है कि उसने कई आतंकी संगठनों को बंद कर उनके खिलाफ कार्रवाई की है। कई आतंकियों को गिरफ्तार कर उनपर मुकदमा चलाया है। मुंबई हमले के मास्‍टरमाइंड हाफिज सईद को गिरफ्तार कर उस पर मामला चलाया गया और उसको कोर्ट ने 11 वर्षों की सजा सुनाई है। इस हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी। 

खुलेआम आतंकी संगठन लेते हैं फंड

रॉयटर के मुताबिक एफएटीएफ ने कहा है कि पाकिस्‍तान इस बात से बखूबी वाकिफ है कि आतंकी संगठनों से रिश्‍ता रखना उसको मुश्किल में डाल सकता है। इस बात में कोई शक नहीं है कि जैश ए मोहम्‍मद, लश्‍कर, जमात उद दावा समेत अल कायदा पाकिस्‍तान की ही जमीन का इस्‍तेमाल करते रहे हैं और खुलेआम फं‍ड उगाही भी करते हैं।  

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