नई दिल्ली, प्रेट्र। भारत और जापान के बीच यहां शनिवार को होने वाली पहली टू-प्लस-टू वार्ता से पहले जापानी विदेश मामलों के मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और जापानी रक्षा मंत्री तारो कोनो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस वार्ता मुख्य फोकस हिंद-प्रशांत क्षेत्र समेत सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जलक्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ाना होगा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे, जबकि जापान की ओर से विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी और रक्षा मंत्री तारो कोनो प्रतिनिधित्व करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और जापान के बीच होने वाली टू-प्लस-टू बैठक से दोनों पक्ष रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की समीक्षा और विचारों का आदान-प्रदान कर सकेंगे।

भारत एवं जापान के बीच पिछले साल हुए 13वें वार्षिक शिखर बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके जापानी समकक्ष एबी शिंजो के फैसले के बाद नए ढांचे के तहत वार्ता हो रही है। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग को और मजबूती देने तथा विशेष सामरिक एवं वैश्विक भागीदारी में प्रगाढ़ता लाने के उद्देश्य से नई व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष क्षेत्र में शांति, समृद्धि एवं प्रगति के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिति तथा भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति' एवं जापान की 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक विजन' के तहत अपने प्रयासों पर चर्चा करेंगे।

भारत व जापान के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग

सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत व जापान के बीच रक्षा क्षेत्र में व्यापक सहयोग की गुंजाइश है। दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग की शुरुआत तो हो गई है, लेकिन रक्षा उपकरणों के सौदों को लेकर अभी तक कोई खास वार्ता भी शुरू नहीं हुई है। दोनों देशों के बीच अभी तक के संबंध बहुत हद तक आर्थिक गतिविधियों तक सीमित है, लेकिन अब इन्हें बदलते वैश्विक माहौल के मुताबिक अपने रिश्तों में भी बदलाव करना होगा।

हिंद-प्रशांत सागर क्षेत्र में दीर्घकालिक नीति

पिछले वर्ष मोदी और शिंजो आबे के बीच हुई बैठक में हिंद-प्रशांत सागर क्षेत्र में दीर्घकालिक नीति के तौर पर साथ करने की सहमति बनी थी। माना जा रहा है कि पहली टू प्लस टू वार्ता इस दीर्घकालिक नीति की रुपरेखा बनाने की शुरुआत करेगी। साथ ही दोनों देश मिल कर हिंद प्रशांत क्षेत्र के दूसरे देशों को किस तरह से ढांचागत परियोजनाओं में मदद करें, इसकी रुपरेखा भी तैयार की जाएगी।

क्या-क्या होगा एजेंडे में

-संयुक्त तौर पर विकसित होने वाले रक्षा उपकरणों को चिन्हित करना

-हिंद-प्रशांत सागर क्षेत्र में दीर्घकालिक नीति को तैयार करना

-इस क्षेत्र के दूसरे देशों में ढांचागत विकास को संयुक्त तौर पर शुरू करना

-तीनों सेनाओं के बीच और करीबी सहयोग का ढांचा तैयार करना।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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