जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तरफ से पुलवामा हमले की निंदा प्रस्ताव को चीन ने शुरुआती आनाकानी के बाद समर्थन तो दे दिया है लेकिन उसके रवैये से साफ है कि पाकिस्तान के आतंकी समर्थन पर फिलहाल आंख मूंद कर रहेगा। इस लिहाज से अगले हफ्ते भारत व चीन के विदेश मंत्रियों के बीच होने वाली बैठक की अहमियत बढ़ गई है।

27 फरवरी, 2019 को चीन के बुझेन शहर में रूस, भारत और चीन (आरआइसी) के विदेश मंत्रियों की सालाना बैठक है। इसमें स्वराज की रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और चीनी विदेश मंत्री के साथ अलग-अलग मुलाकात होगी। भारत की कोशिश होगी कि तीनों देशों की तरफ से जारी होने वाले संयुक्त बयान में भी सीमा पार से चलाये जा रहे आतंकवाद के मुद्दे पर कड़े संकेत दिया जाए।

जानकारों का कहना है कि चीन इसके पहले भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में जैश का नाम संयुक्त घोषणा पत्र में शामिल करने को तैयार हो चुका है। साथ ही रूस भी सीमा पार आतंक के मुद्दे पर पूरी तरह से भारत के रुख का समर्थन करता है।

उक्त तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की अंतिम बैठक दिसंबर, 2017 में तब हुई थी जब भारत व चीन के बीच डोकलाम विवाद अभी भी समाप्त हुआ था। तब भी तीनों देशों की तरफ से जारी संयुक्त बयान में सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर काफी कुछ कहा गया था। भारत पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग थलग करने की कोशिश के तहत इस तरह के कदम उठा रहा है।

 

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