नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में रैली, आरोप-प्रत्यारोप, कसमों-वादों का दौर जारी है। चुनाव प्रचार अपने शबाब पर है। नवाज शरीफ के बाद देश अपना नया प्रधानमंत्री चुनने के लिए कमर कस चुका है। पाकिस्‍तान के चुनाव में इस बार दो पहलू बड़े दिलचस्‍प हैं। उनमें से एक है यहां पर पीएम मोदी का शोर और पार्टियों के चुनावी घोषणा पत्र से गायब कश्‍मीर मुद्दा। दरअसल, पाक का कोई भी नेता ऐसा नहीं है जो कश्‍मीर के नाम पर अपनी सियासत को चमकाता न हो, लेकिन इसके उलट उनके घोषणा पत्र से ये मुद्दा लगभग गायब है। वहीं यहां के बड़े-बड़े नेता जीत के लिए पीएम मोदी के नाम का जाप कर रहे हैं। कोई खुद को जिताने के एवज में मोदी के विकास रथ को रोकने के वादे-इरादे जता रहा है तो कोई मोदी के बहाने अपने हुक्मरानों पर तंज कस रहा है।  

घोषणापत्रों से गायब कश्मीर मुद्दा
चुनाव के दौरान राजनीतिक दल अपने घोषणापत्रों में उन्ही मसलों-मुद्दों को समाहित करते हैं जो जनता की दुखती रग होते हैं। प्रचार के दौरान जिनका उल्लेख करके वे मतदाता के मनोभावों को मतों में तब्दील कर सकें। पाकिस्तान के इस 13वें आम चुनाव में कश्मीर मुद्दे की किसी दल के घोषणा-पत्र में प्रभावी उपस्थिति न होना यह बताती है कि वहां के लोग अब इस ‘के’ मैजिक से बहुत इत्तेफाक नहीं रखते हैं। ‘कोऊ नृप होय हमय का हानी’...तर्ज पर इस मसले से अन्यमनस्क हो चुके हैं। आइए, देखते हैं कि किस दल ने अपने घोषणापत्र में कश्मीर को कितनी अहमियत दी है।

पीटीआइ
क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान की इस पार्टी ने चुनावी घोषणा- पत्र में आतंकवाद और चरमपंथ को प्रमुखता से स्थान दिया है। उसने अवाम पर इसके विनाशकारी प्रभावों की बात की है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआइ) को सेना का समर्थन हासिल है। हैरानी की बात यह है कि इस दल के घोषणा-पत्र में कश्मीर नाम सिर्फ दो बार लिया गया है।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी
बिलावल भुट्टो जरदारी के नेतृत्व वाली इस पार्टी ने भी अपने घोषणापत्र में आतंकवाद के चलते पाकिस्तान के वैश्विक पटल पर अलग-थलग पड़ने की बात कही है। पार्टी के चालीस पेज के घोषणापत्र में कश्मीर का नाम चार बार आया है। इसमें कश्मीर के लिए स्वायत्ता की बात कही गई है। साथ ही भारत- पाकिस्तान के बीच कनेक्टिविटी और गर्मजोशी भरे व्यापारिक संबंधों पर जोर दिया गया है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को लेकर पारदर्शिता बरतने की बात भी शामिल है।

पीएमएल-एन
पदच्युत किए गए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी ने घोषणापत्र में कहा है कि उसका लक्ष्य चरमपंथ को खत्म करने, आतंकवाद को शिकस्त देने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और सभी हितधारकों के बीच शांति एवं समृद्धि का साझा दृष्टिकोण बनाने का है। कश्मीर पर सिर्फ दो लाइनें लिखी गई हैं।

मोदी भी मैनिफेस्टो का हिस्सा
लश्कर-ए-तैयबा के अलावा कुछ छोटी और कमजोर पार्टियां ऐसी हैं जिन्होंने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने घोषणापत्र में भी शामिल किया है।

भारत में भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई
शाहबाज शरीफ चुनावी रैलियों और प्रदर्शनों में लोगों को यह बताने से नहीं चूक रहे हैं कि देखो भारत क्या कर रहा है और हमारे यहां क्या हो रहा है। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि भारत में भ्रष्टाचारी राजनेताओं पर सख्त कार्रवाई होती है। हमारे यहां का हाल देखिए। अरबों का घोटाला करके आज लोग चुनाव लड़ रहे हैं। लोग तमाम तरीके का गलत काम करके उपदेश दे रहे हैं।

पाकिस्तान का इकबाल तभी बुलंद होगा, जब निष्पक्ष चुनाव कराए जाएंगे। देश की अर्थव्यवस्था ढहने के कगार पर है और पाकिस्तान चुनाव आयोग पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की कठपुतली बना हुआ है। देश में विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ एक महीने के आयात क्षमता जितना ही बचा है। शेयर बाजार बैठा जा रहा है। किसी को कोई परवाह ही नहीं है।

आतंकी सूची में शामिल मौलवी ने इमरान की पार्टी को दिया समर्थन
अमेरिका की आतंकी सूची में शामिल पाकिस्तान के मौलवी मौलाना फजलुर रहमान खलील ने आम चुनाव में इमरान खान की पार्टी का समर्थन करने का एलान किया है। इमरान की पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मौलाना खलील अपने समर्थकों के साथ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआइ) में शामिल हो गए हैं। इस पर कई लोगों ने हैरानी जाहिर की है।

एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने 30 सितंबर, 2014 को स्पेशली डेजेनेटेड ग्लोबल टेररिस्ट (एसडीजीटी) सूची में खलील का नाम डाला था। आतंकी संगठन हरकतउल मुजाहिदीन में भूमिका के चलते उसे इस सूची में डाला गया था। उसने इस आतंकी संगठन की स्थापना की थी। इसके बाद खलील ने अंसार-उल उम्मा का गठन किया और अभी इसका मुखिया है। वह दावा करता है कि यह सियासी पार्टी है।

‘कट्टरपंथियों की खुलेआम सहायता करती है पाक सेना’
अमेरिका के एक प्रभावशाली सांसद ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की सेना अपने यहां कट्टरपंथियों की खुले तौर पर सहायता करती है। उन्होंने मुहाजिर समुदाय के अधिकारों के समर्थन में आवाज भी उठाई है। मुहाजिर दिवस के मौके पर यहां आयोजित सम्मेलन में अमेरिकी सांसद डाना रोहराबेकर ने कहा, ‘कराची में मुहाजिरों की हत्या में पाकिस्तानी सेना के भ्रष्ट अधिकारी लिप्त रहे हैं। वे खुलेआम धार्मिक कट्टरपंथियों की सहायता करते हैं। यह किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।’ मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के कई थिंक टैंक के प्रतिनिधि, वरिष्ठ पत्रकार, ब्लॉगर और कई क्षेत्रों के लोग शामिल हुए थे। अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की समिति के सदस्य रोहराबेकर ने कहा, मुहाजिरों को पाकिस्तान में जूझना पड़ रहा है। मैं पूरी तरह उनके समर्थन में हूं।

कभी पाकिस्तान के दोस्त थे रोहराबेकर
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के करीबी रोहराबेकर कैलिफोर्निया से सांसद हैं। वह एक समय पाकिस्तान के करीबी दोस्त माने जाते थे, लेकिन आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने के चलते वह अब पाकिस्तान के मुखर आलोचक बन गए हैं।

कौन हैं मुहाजिर
मुहाजिर शब्द का इस्तेमाल उर्दू बोलने वाले उन लोगों के लिए किया जाता है जो 1947 में भारत से पाकिस्तान चले गए थे। ऐसे लोगों की बड़ी आबादी पाकिस्तान के सिंध प्रांत में रहती है। 

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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