मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी बुधवार (4 सितंबर, 2019) को महज 36 घंटे की यात्रा पर रूस के मशहूर शहर व्लदिवोस्तोक पहुंचेंगे लेकिन यह छोटी सी यात्रा दोनो देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई पर पहुंचाने वाला साबित होगा। पीएम मोदी वहां ईस्टर्न इकोनोमिक फोरम (ईईएफ) की बैठक में शिरकत करने के साथ ही राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ भारत-रूस सालाना शीर्ष बैठक की भी अगुवाई करेंगे।

शीर्ष बैठक के बाद दो ऐसी अहम घोषणाएं होंगी जो भारत और रूस के रिश्तों को नई दिशा देंगे। इसके तहत दोनो देश अगले पांच वर्षो के लिए हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में सहयोग का एजेंडा तय करेंगे। साथ ही रूस में प्रशिक्षित पेशवरों की कमी भारत से पूरा करने के लिए एक सहयोग पर भी हस्ताक्षर होगा।

 भारत हाइड्रोकार्बन उत्पाद में करेगा निवेश
भारत और रूस के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पहले से ही काफी तेजी से बढ़ रहा है लेकिन अब इसे नई ऊंचाई पर ले जाने की सहमति बनी है। मोटे तौर पर भारत सिर्फ रूस से हाइड्रोकार्बन उत्पाद खरीदने वाला ही नहीं होगा बल्कि वहां निवेश करने वाला देश भी होगा। पांच वर्षीय एजेंडा के तहत भारतीय कंपनियां तेल और गैस भंडार से भरपूर रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में निवेश करेंगी। साथ ही भारत रूस से एलएनजी खरीद का समझौता भी करेगा।

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ऊर्जा स्त्रोतों का विस्तार करने में रूस की बड़ी भूमिका
मोदी और पुतिन के बीच रूस से भारत तक गैस पाइपलाइन बिछाने को लेकर भी बात होगी लेकिन अफगानिस्तान व पाकिस्तान के हालात को इसमें एक बड़ी अड़चन के तौर पर देखा जा रहा है। दोनो देशों के भावी ऊर्जा एजेंडा के बारे में विदेश सचिव विजय गोखले का कहना है कि ''भारत अपने ऊर्जा स्त्रोतों का विस्तार करने लिए कई देशों के साथ बात कर रहा है। रूस की इसमें एक बड़ी भूमिका होगी। भारत दुनिया का एक बड़ा ऊर्जा खरीददार देश बन चुका है। दूसरी तरफ रूस में एक के बाद एक बड़े ऊर्जा भंडार खोजे जा रहे हैं। ऐसे में दोनो देशों की सरकारें संभावनाएं तलाश रही हैं।''

रूस में हीरा तराशने की इकाई लगाने को इच्छुक हैं भारतीय उद्यमी
रूस के कई औद्योगिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित श्रम की कमी महसूस की जा रही है जिसे भारत पूरा करने को इच्छुक है। हाल के वर्षों में दोनो देशों के बीच हीरे के कारोबार में भारी वृद्धि को देखते हुए यहां काफी संभावनाएं बन रही है। अभी रूस से भारत हीरे मंगवाये जाते हैं और यहां तराश कर उन्हें फिर से रूस से निर्यात किया जाता है जहां से दूसरे देशों को इसे भेजा जाता है।

अब कई भारतीय उद्यमी रूस में ही हीरा तराशने की इकाई लगाने को इच्छुक हैं लेकिन वहां योग्य कारीगरों की कमी है। भारत और रूस के बीच बात हो रही है कि किस तरह से यहां से प्रशिक्षत कारीगरों को वहां भेजा जाए। इसी तरह से खनिज उत्पादों से भरपूर सुदूर पूर्व के क्षेत्र में प्रशिक्षित खनिकों की कमी है। भारत वहां भी इस कमी को पूरा करने में सक्षम है। इस बारे में मोदी और पुतिन की बैठक के बाद घोषणा होने की उम्मीद है।

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अफगानिस्तान और रक्षा सौदों पर होगी बात
मोदी और पुतिन के बीच होने वाली शीर्ष वार्ता में अफगानिस्तान और रक्षा सौदों का मामला भी एजेंडा में काफी ऊपर है। गोखले मानते भी है कि भारत-रूस द्विपक्षीय रिश्तों में रक्षा सौदे रीढ़ की तरह है। भारत अभी भी अपनी कुल रक्षा जरुरत का 60-65 फीसद आपूर्ति रूस से करता है।

अमेरिका की आपत्ति के बावजूद भारत ने रूस से एस-400 एंटी मिसाइल सिस्टम खरीदा है। अब केए-226 हेलीकॉप्टर खरीदने की बात हो रही है। गोखले के मुताबिक रक्षा सौदे को लेकर कोई घोषणा अभी नहीं होगी। इसी तरह से मोदी व पुतिन के बीच अफगानिस्तान शांति वार्ता को लेकर भी बात होगी। अमेरिका व तालिबान के बीच होने वाले समझौते में भारत व रूस साझा हित तलाश रहे हैं।

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मोदी-पुतिन वार्ता का एजेंडा
1. रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र के हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में भारत निवेश को इच्छुक
2. भारत रूस से एलएनजी खरीद का नया समझौता करने को तैयार
3. रूस से भारत तक गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना
4. सुदूर पूर्वी क्षेत्र के खनन क्षेत्र में भारत अपनी श्रमशक्ति भेजने को तैयार
5. रूस के हीरा तराशने के काम में भी प्रशिक्षित भारतीय कारीगरों की मांग
6. तालिबान के साथ हो रही अफगानिस्तान शांति वार्ता में साझा हित तलाश रहे हैं दोनो देश
7. नए माहौल में भारत की रक्षा जरुरतों के मुताबिक हथियारों की आपूर्ति पर वार्ता

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Posted By: Arun Kumar Singh

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