नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। भारत ने एलान किया है कि वह मारीशस के साथ अपने मौजूदा सामुद्रिक सहयोग को और प्रगाढ़ करेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की मदद से तैयार कुछ परियोजनाओं का वर्चुअल तरीके से शुभारंभ करते हुए कहा कि मारीशस व भारत के बीच सामुद्रिक सहयोग की वजह से ही उन्होंने 'सागर' (क्षेत्र के सभी देशों के बीच सहयोग व विकास) नीति की परिकल्पना की है। पीएम मोदी के साथ मारीशस के उनके समकक्ष प्र¨वद जगनाथ भी इस समारोह में उपस्थित थे।

भारत की मदद से मारीशस में आवासीय परियोजना का शुभारंभ किया गया है। पीएम ने दो नई परियोजनाओं का शिलान्यास भी रखा। इनमें मारीशस में अत्याधुनिक लोक प्रशासन कालेज भवन व आठ मेगावाट सोलर पावर प्लांट परियोजना शामिल हैं। समारोह के दौरान दोनों देशों के बीच दो अहम समझौते भी हुए। इसके तहत भारत मेट्रो एक्सप्रेस व अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए मारीशस को 19 करोड़ डालर (करीब 1,413 करोड़ रुपये) की कर्ज सुविधा प्रदान करेगा।

साथ ही छोटी विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी हुए। मारीशस के प्रधानमंत्री जगनाथ ने सहयोग के लिए भारत का आभार जताया। मारीशस के पीएम प्रविंद जगन्नाथ (Pravind Jugnauth) ने कहा कि मेट्रो एक्सप्रेस परियोजना के लिए भारत के समर्थन का आभार व्यक्त करने के लिए मेरी सरकार ने एक प्रमुख मेट्रो स्टेशन का नाम 'महात्मा गांधी' स्टेशन रखने का फैसला किया है।

पीएम मोदी ने साफ तौर पर कहा कि भारत जब अपने मित्र देशों की मदद का फैसला करता है, तो वह पूरी तरह से उनकी जरूरत और मांग के आधार पर होता है। भारत अपने मित्र देशों की संप्रभुता का पूरा आदर करता है। इसके साथ ही भारत की यह भी कोशिश होती है कि उस देश की अपनी क्षमता में विस्तार हो।

पीएम मोदी का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल के महीनों में चीन की तरफ से श्रीलंका, मालदीव व दूसरे अफ्रीकी देशों को दी जाने वाली मदद को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। चीन की मदद से तैयार होने वाले पाकिस्तान इकोनामिक कारिडोर को भारत अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है। भारत ने हाल ही में श्रीलंका की भी आर्थिक मदद की है, जो पूरी तरह वहां की सरकार की मांग के मुताबिक थी। पड़ोसी देश नेपाल, भूटान व बांग्लादेश की भी वहां की सरकार की मांग के मुताबिक मदद की जाती है।

Edited By: Krishna Bihari Singh